वाराणसी: काशी स्टेशन के विस्तारीकरण को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। रेलवे प्रशासन की ओर से गंज शहीदा मस्जिद पर खाली करने का नोटिस चस्पा किया गया है, जिसके बाद स्थानीय मुस्लिम समुदाय में नाराजगी देखने को मिल रही है।
20 जून तक खाली करने का निर्देश रेलवे द्वारा लगाए गए नोटिस में मस्जिद परिसर को 20 जून तक खाली करने का निर्देश दिया गया है। नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद किसी भी समय ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है। रेलवे की इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में चर्चा और विरोध के स्वर तेज हो गए हैं।
मुस्लिम समुदाय ने जताई नाराजगी
स्थानीय लोगों का कहना है कि गंज शहीदा मस्जिद लगभग एक हजार वर्ष पुरानी है और इसका निर्माण उस समय हुआ था जब काशी स्टेशन का अस्तित्व भी नहीं था। समुदाय के लोगों का आरोप है कि ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की इस मस्जिद को हटाने की कोशिश की जा रही है।
मसाजिद कमेटी ने नोटिस को बताया अवैध
अंजुमन इंतजामियां मसाजिद कमेटी के सचिव मोहम्मद यासिन ने मस्जिद पर चस्पा किए गए नोटिस को अवैध बताया है। उनका कहना है कि मस्जिद को लेकर कोई मुकदमा लंबित नहीं था और न ही किसी कानूनी प्रक्रिया की जानकारी कमेटी को दी गई।
“कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश”
मोहम्मद यासीन ने कहा कि यदि रेलवे ने बिना उचित प्रक्रिया के नोटिस लगाया है तो यह कहीं न कहीं कानून व्यवस्था को प्रभावित करने वाली कार्रवाई प्रतीत होती है। उन्होंने दावा किया कि गंज शहीदा मस्जिद का निर्माण वर्ष 1034 में अलवी शहीद द्वारा कराया गया था और इसका ऐतिहासिक महत्व है।
आगे की स्थिति पर नज़र
रेलवे के नोटिस के बाद अब सभी की निगाहें आगामी घटनाक्रम पर टिकी हैं। मस्जिद प्रबंधन समिति और स्थानीय समुदाय आगे की कानूनी रणनीति पर विचार कर रहे हैं, जबकि रेलवे की ओर से अभी इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
रिपोर्ट-मदन मोहन शर्मा


