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यह एक बड़ा भ्रम है कि नीलामी में बड़ी रक़म मिलने से टीम में बड़ी भूमिका भी पक्की हो जाती है। लेकिन हक़ीक़त में फ़्रेंचाइज़ी क्रिकेट बेहद बेरहम हो सकता है। टीमें करोड़ों रुपये सिर्फ़ तत्काल प्रयाेग, प्रभाव या परिणाम के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की योजनाओं के लिए भी ख़र्च करती हैं। नतीजा यह कि कई स्थापित और महंगे क्रिकेटर पूरा IPL 2026 सीज़न डगआउट में बैठकर देखते रह गए। उनमें से एक तो कभी भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी उम्मीद हुआ करता था। तनख़्वाह मिलती रहे पर काम न मिले, यह किसी के लिए भी तकलीफ़देह होता है। लेकिन एक एथलीट के लिए यह दोगुना कठिन है। उसका करियर गिनती के कुछ सीज़न का होता है। हर बैठा हुआ मैच वापस नहीं आता।

दिल्ली कैपिटल्स ने पृथ्वी शॉ को 75 लाख रुपये में किया शामिल

एक समय था जब पृथ्वी शॉ भारतीय क्रिकेट का भविष्य माने जाते थे। अंडर-19 वर्ल्ड कप विजेता कप्तान, टेस्ट डेब्यू पर ही शतक जड़ने वाले बल्लेबाज़ और आईपीएल के सबसे निडर युवा ओपनरों में से एक। आज उनके करियर की कहानी बिल्कुल अलग दिखती है। 79 आईपीएल मैच और 14 अर्धशतकों के प्रभावशाली रिकॉर्ड के बावजूद, पृथ्वी शॉ IPL 2025 के ऑक्शन में अनसोल्ड रहे, जो एक चौंकाने वाला पतन था। दिल्ली कैपिटल्स ने 2026 में उन्हें ₹75 लाख में वापस खरीदा और एक भावुक वीडियो जारी कर कहा, “Our boy is back home” लेकिन शॉ न केवल प्लेइंग XI में जगह नहीं बना पाए, बल्कि कई बार तो वह मैच-डे बेंच (अंतिम 15) का हिस्सा भी नहीं थे। दिल्ली ने घर वापसी का जश्न तो शानदार मनाया, बस उन्हें मैदान पर उतरने की जगह देना भूल गई।

RCB ने मंगेश यादव पर लगाया 5.20 करोड़ रुपये का दांव

अगर पृथ्वी शॉ की कहानी खराब फॉर्म और संघर्ष की रही, तो मंगेश यादव की कहानी क्रांति की सामने आ गई। मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव में रहने वाले मंगेश, एक ट्रक ड्राइवर के बेटे हैं। 2025 के एमपी प्रीमियर लीग में उन्होंने सिर्फ 6 मैचों में 14 विकेट लेकर सबका ध्यान खींचा था। शानदार प्रदर्शन के बाद रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने मिनी ऑक्शन में 30 लाख रुपये के बेस प्राइस वाले इस खिलाड़ी को 5.20 करोड़ रुपये में खरीदा, जो करीब 1633 प्रतिशत की बड़ी हिस्सेदारी थी।

ईशांत शर्मा (गुजरात टाइटंस) ₹75 लाख

आईपीएल में 117 मैचों का लंबा और समृद्ध अनुभव। उन्हें उनके बेस प्राइस पर खरीदा गया था। लेकिन गुजरात की पेस यूनिट पहले से ही अंतरराष्ट्रीय सितारों से भरी हुई थी…मोहम्मद सिराज, कगिसो रबाडा और प्रसिद्ध कृष्णा। जब आपके पास तीन फ्रंटलाइन विकल्प मौजूद हों, तो चौथे के लिए जगह बनाना नामुमकिन हो जाता है। ईशांत पूरा सीज़न सिर्फ बेंच पर ही बैठे नज़र आए।

राहुल त्रिपाठी (KKR) ₹75 लाख

100 से ज़्यादा आईपीएल मैचों का अनुभव। लंबे समय तक जिन्हें इस लीग के सबसे सक्रिय और आक्रामक भारतीय बल्लेबाज़ों में गिना जाता रहा। इसके बावजूद वह KKR की प्लेइंग XI में अपनी जगह नहीं बना सके। अंगकृष रघुवंशी और फिल सॉल्ट ने अपने शानदार प्रदर्शन से अपनी जगह बनाए रखी, जिसके चलते त्रिपाठी को पूरा सीज़न बाहर बैठकर ही मैच देखना पड़ा।आईपीएल की सबसे कठिन लड़ाई हमेशा मैदान पर नहीं होती। आईपीएल में सबसे मुश्किल प्रतिस्पर्धा अक्सर विरोधी टीम के ख़िलाफ़ नहीं होती। वह आपके अपने ही ड्रेसिंग रूम के भीतर होती है।

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