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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हैदराबाद क्षेत्रीय कार्यालय ने गुरुवार को नौहेरा शेख को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी हीरा समूह और अन्य के खिलाफ निवेशकों के साथ की गई धोखाधड़ी से जुड़ी है।

शेख पर आरोप है कि उसने 1,72,114 निवेशकों के साथ 3,000 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की। उसने लोगों को 36% के भारी रिटर्न का लालच दिया। जब निवेशकों ने अपने पैसे वापस मांगने शुरू किए, तो शेख ने उन्हें लाभ राशि देने के बजाय मूलधन हड़प लिया। मामले में दर्ज हुई हैं कई एफआईआर
ईडी के मुताबिक, आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसे तुरंत हैदराबाद ले जाया गया। पीएमएलए न्यायालय, हैदराबाद ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। ईडी ने तेलंगाना पुलिस और आंध्र प्रदेश पुलिस द्वारा नौहेरा शेख, मौली थॉमस, बिजू थॉमस और हीरा समूह की कंपनियों के खिलाफ देशभर के पीड़ित जमाकर्ताओं द्वारा दर्ज कराई गई कई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की है। नौहेरा शेख पर निवेशकों के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने का आरोप है। नौहेरा शेख और उनसे जुड़े व्यक्तियों ने जमाकर्ताओं की धनराशि को कंपनी के बैंक खातों के माध्यम से अपने निजी खातों में स्थानांतरित कर दिया। इसके अलावा, शेख ने बैंकों में जमा निवेशकों के पैसे अपने निजी खातों में ट्रांसफर कर दिए और इस धन का उपयोग चल और अचल संपत्तियां खरीदने में किया। 

जांच को बाधित करने का प्रयास  

जांच के दौरान, ईडी ने अपराध की आय से खरीदी गई विभिन्न संपत्तियों की पहचान की। पीएमएलए के प्रावधानों के तहत उन्हें जब्त कर लिया गया। नौहेरा शेख ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष डब्लूपीपी संख्या 31/2020 और एमए संख्या 2227/2024 दायर कर चल रही जांच को गलत तथ्यों के आधार पर बाधित करने का प्रयास किया। वह गलत तथ्यों पर आधारित आदेश प्राप्त करके चल रही जांच में देरी करने में सफल रहीं। इसके अलावा, न्यायालय के समक्ष सुनवाई के दौरान उन्होंने गलत हलफनामा देकर न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास किया कि सीके मौला शरीफ 580 करोड़ रुपये की संपत्तियां खरीदने के लिए तैयार थे और अपने दावे के समर्थन में कुछ बैंक खाते से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए।

शरीफ के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई 
हालांकि, न्यायालय ने पाया कि उक्त व्यक्ति के हलफनामे में उल्लिखित बैंक खाते में कोई धनराशि नहीं थी। इसके बाद सीके मौला शरीफ के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही का आदेश दिया गया। जांच के दौरान, नौहेरा शेख ने संबंधित तहसीलदार/राजस्व अधिकारियों के समक्ष गलत हलफनामा देकर ईडी की कुछ सत्यापित कुर्क संपत्तियों को बेच दिया। इसके जरिए अपराध की आय अर्जित की गई। इसके परिणामस्वरूप, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। ईडी द्वारा समय-समय पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर इन सभी तथ्यों को सर्वोच्च न्यायालय के संज्ञान में लाया गया। न्यायालय ने इन सभी तथ्यों को गंभीरता से लिया। पहली बार सर्वोच्च न्यायालय ने डब्लूपी (आपराधिक) संख्या 31/2020 और एमए संख्या 2227/2024 में ईडी के पक्ष में आदेश दिया कि पीएमएलए न्यायालय के मुकदमे और ज़ब्ती आदेशों से पहले सभी कुर्क संपत्तियों की नीलामी शुरू की जाए। एसएफआईओ के माध्यम से निवेशकों का पैसा वापस किया जाए।
सफल नीलामी से प्राप्त हुए 122 करोड़ रुपये 
सर्वोच्च न्यायालय ने नौहेरा शेख को चल रही नीलामी में ईडी के साथ सहयोग करने और अपराध की आय या अपराध के धन का उपयोग करके अपने नाम या अपने सहयोगियों के नाम पर पंजीकृत संपत्तियों के लिए विक्रय विलेख निष्पादित करने का भी निर्देश दिया था। ईडी ने नीलामी की कार्यवाही शुरू की। कुछ संपत्तियों की सफल नीलामी से लगभग 122 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। नौहेरा शेख से नीलाम की गई संपत्तियों के विक्रय विलेख निष्पादित करने का अनुरोध किया गया था। हालांकि, नौहेरा शेख ने सफल बोलीदाताओं के पक्ष में विक्रय विलेख निष्पादित करने में सहयोग नहीं किया। नीलामी की कार्यवाही में बाधा डालने के बार-बार प्रयास किए गए।
कोर्ट ने लिया आचरण पर गंभीर संज्ञान  
ईडी ने फिर से सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की। इसमें कहा गया कि आरोपी के आचरण पर सवाल उठाए गए। न्यायालय ने उनके आचरण का गंभीर संज्ञान लेते हुए, 8 अप्रैल 2026 के आदेश के माध्यम से उन्हें एक सप्ताह के भीतर जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने और 2 महीने के भीतर नीलाम की गई 16 संपत्तियों के विक्रय विलेख निष्पादित करने का निर्देश दिया। आदेश का पालन न करने पर, उनके खिलाफ गैर-कानूनी वारंट जारी करने के साथ-साथ कानून के अनुसार उनकी जमानत रद्द करने का भी निर्देश दिया गया। हालांकि, उन्होंने जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण नहीं किया। चूंकि उन्होंने सहयोग नहीं किया, इसलिए ईडी ने सर्वोच्च न्यायालय के दिनांक 8.04.2026 के आदेश के अनुपालन में उनकी जमानत रद्द करने और गैर-कानूनी वारंट जारी करने के लिए विशेष पीएमएलए न्यायालय से संपर्क किया था।
विशेष न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास 
उक्त जमानत रद्द करने और गैर-कानूनी वारंट जारी करने की कार्यवाही के दौरान आरोपी ने विशेष न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास किया। उन्होंने एक हलफनामा दायर किया, जिसमें उन्होंने न्यायालय को बताया कि उन्होंने हैदराबाद जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया था, लेकिन उसे हिरासत में लेने से इनकार कर दिया गया। न्यायालय ने जेल अधिकारियों से पूछताछ की, जिन्होंने बताया कि उन्होंने कभी आत्मसमर्पण के लिए उनसे संपर्क नहीं किया था। विशेष पीएमएलए न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के दिनांक 8.04.2026 के आदेश के आलोक में पूरे मामले की जांच की। उनके भ्रामक आचरण को भी ध्यान में रखते हुए 07.05.2026 को उनके खिलाफ गैर-कानूनी वारंट जारी किया। ईडी को वारंट निष्पादित करने और उन्हें न्यायालय के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया। विशेष न्यायालय ने इस मामले में उनकी जमानत भी रद्द कर दी।
गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार
ईडी के अधिकारियों ने हैदराबाद और बेंगलुरु के ज्ञात पतों पर उनका पता लगाने और उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास किए, लेकिन वे वहां नहीं मिलीं। पता चला कि वे गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार हो गई थीं। मिली सूचनाओं के आधार पर, ईडी ने बेंगलुरु से उन्हें गिरफ्तार करने का प्रयास किया, लेकिन वे वहां भी नहीं मिलीं। इसके बाद, ईडी को स्थानीय सूत्रों से खुफिया जानकारी मिली कि नौहेरा शेख हरियाणा के गुरुग्राम में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके फर्जी पहचान के साथ छिपी हुई थीं। उनके साथ सहयोगी समीर खान भी था। उक्त खुफिया जानकारी पर तुरंत कार्रवाई करते हुए, ईडी के अधिकारियों ने हरियाणा पुलिस के अधिकारियों के साथ मिलकर उनका और उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए वाहन का पता लगाया।
यूं हुई आरोपी शेख की गिरफ्तारी
आरोपी की गिरफ्तारी के लिए एक संयुक्त अभियान चलाया गया। नौहेरा शेख को 21 मई 2026 को सॉल्ट स्टेज़, सेक्टर-45, गुरुग्राम, से सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया गया। वे अपने साथी समीर खान के साथ शेख खमर जहां के नाम से जारी आधार कार्ड पर रह रही थीं। पीएमएलए के तहत विशेष न्यायालय द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट के अनुपालन में, उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर हैदराबाद लाया गया। 21 मई 2026 की देर रात हैदराबाद स्थित पीएमएलए न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इससे पहले, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में ईडी द्वारा अचल संपत्तियों की नीलामी में हस्तक्षेप करने का प्रयास कर रहे कल्याण बनर्जी नामक एक धोखेबाज को ईडी ने 10.01.2026 को सिकंदराबाद से गिरफ्तार किया था। नौहेरा शेख की सूचना पर वह स्वयं को एक वकील और वरिष्ठ नौकरशाहों/राजनेताओं का करीबी बताकर ईडी अधिकारियों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहा था।
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