चंडीगढ़: हरियाणा में विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के पहले चरण की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इसके बाद शनिवार को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी गई। इस सूची में बड़ी संख्या में बदलाव देखने को मिले हैं। राज्य के कुल दो करोड़ छह लाख से अधिक मतदाताओं में से एक करोड़ 72 लाख 27 हजार 135 मतदाताओं के नाम ही ड्राफ्ट सूची में शामिल किए गए हैं, जबकि करीब 33.84 लाख मतदाताओं के नाम फिलहाल सूची से हटा दिए गए हैं।
सबसे ज्यादा प्रभावित शहरी क्षेत्र रहे हैं। गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, सोनीपत और अन्य तेजी से विकसित हो रहे शहरों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं मिले। अधिकारियों का मानना है कि लगातार पलायन, पता बदलने, एक से अधिक जगह पंजीकरण और दस्तावेजों में अंतर जैसी वजहों से यह स्थिति सामने आई है।
2002 की मतदाता सूची से नहीं हो पाया मिलान
चुनाव आयोग की जांच के दौरान एक और अहम तथ्य सामने आया है। ड्राफ्ट सूची में करीब 18.57 लाख ऐसे मतदाता मिले हैं, जिनका मिलान वर्ष 2002 में हुए अंतिम विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान तैयार मतदाता सूची से नहीं हो सका। ऐसे मामलों में चुनाव अधिकारी संबंधित मतदाताओं को नोटिस जारी करेंगे। नोटिस मिलने के बाद मतदाताओं को अपने पहचान और निवास से जुड़े आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे, ताकि उनकी पात्रता की पुष्टि की जा सके। दस्तावेज सही पाए जाने पर उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में फिर से जोड़ा जा सकता है।
नाम हटने का मतलब वोट का अधिकार खत्म होना नहीं
चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट सूची से नाम हटने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति का मतदान का अधिकार हमेशा के लिए समाप्त हो गया है। यह केवल पुनरीक्षण प्रक्रिया का हिस्सा है। जिन लोगों के नाम सूची में नहीं हैं या जिनके नाम हटाए गए हैं, उन्हें आपत्ति दर्ज कराने और आवश्यक प्रमाण प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया जाएगा। यदि किसी मतदाता को लगता है कि उसका नाम गलती से हट गया है, तो वह निर्धारित समय सीमा के भीतर दावा या आपत्ति दर्ज कर सकता है। जांच पूरी होने के बाद सही पाए जाने वाले नामों को अंतिम मतदाता सूची में शामिल कर लिया जाएगा।
शहरी इलाकों में क्यों बढ़ी संख्या?
विशेषज्ञों के अनुसार, हरियाणा के बड़े शहरों में नौकरी, शिक्षा और कारोबार के कारण लोगों का लगातार आना-जाना लगा रहता है। कई लोग नया पता अपडेट नहीं कराते, जबकि कुछ के नाम अलग-अलग स्थानों पर दर्ज पाए जाते हैं। इसी वजह से शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में नामों का सत्यापन नहीं हो सका और उन्हें फिलहाल ड्राफ्ट सूची से बाहर रखा गया है।
अब आगे क्या होगा?
ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद अब दावा और आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू होगी। इस दौरान मतदाता अपने नाम की जांच कर सकेंगे और यदि कोई त्रुटि मिलती है तो उसे सुधारने के लिए आवेदन दे सकेंगे। सभी दावों और आपत्तियों का निस्तारण होने के बाद चुनाव आयोग अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करेगा।
चुनाव आयोग ने राज्य के सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे अपने नाम और विवरण की जांच जरूर करें। यदि किसी प्रकार की गलती दिखाई देती है तो समय रहते उसे ठीक कराने की प्रक्रिया पूरी करें, ताकि चुनाव के दिन मतदान करने में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

