हिमाचल प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले ही सियासी हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भारतीय जनता पार्टी को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के कई मौजूदा विधायकों के टिकट कट सकते हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, भाजपा के कुछ नेता कांग्रेस के संपर्क में भी हैं और आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
सीएम सुक्खू ने यह बयान ऐसे समय में दिया है, जब भाजपा लगातार कांग्रेस सरकार के कामकाज पर सवाल उठा रही है। भाजपा की ओर से सत्ता में वापसी का दावा किया जा रहा है और कहा जा रहा है कि सरकार बनने के बाद मौजूदा कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में लिए गए फैसलों की समीक्षा की जाएगी।
भाजपा के कई विधायकों के टिकट कटने का दावा
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दावा किया कि भाजपा के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी के कई मौजूदा विधायकों को आगामी चुनाव में दोबारा टिकट नहीं मिलने की स्थिति बन सकती है। सुक्खू ने यह भी कहा कि भाजपा के कुछ नेता कांग्रेस नेताओं के संपर्क में हैं। हालांकि उन्होंने किन नेताओं के नाम पार्टी के साथ बातचीत में होने का दावा किया है, इसे सार्वजनिक नहीं किया। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद हिमाचल की सियासत में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। अब भाजपा के भीतर यह सवाल उठने लगा है कि क्या पार्टी आगामी चुनाव में बड़े पैमाने पर अपने उम्मीदवारों में बदलाव कर सकती है।
भाजपा पर पलटवार, बोले- पहले अपने घर की चिंता करें
सीएम सुक्खू ने भाजपा के उस दावे पर भी निशाना साधा, जिसमें पार्टी सत्ता में आने के बाद कांग्रेस सरकार के पांच साल के फैसलों की समीक्षा करने की बात कह रही है। सुक्खू का कहना है कि भाजपा को कांग्रेस के फैसलों की चिंता करने से पहले अपने संगठन और नेताओं की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक तरफ भाजपा कांग्रेस सरकार के फैसलों की समीक्षा की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के भीतर ही नेताओं को हटाने और पदों में बदलाव का सिलसिला चल रहा है। ऐसे में भाजपा को पहले अपने संगठन की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
जयराम ठाकुर के नेतृत्व में सत्ता वापसी का दावा
भाजपा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व में सत्ता में वापसी की बात कही जा रही है। पार्टी के नेता लगातार कांग्रेस सरकार के कामकाज पर सवाल उठा रहे हैं और जनता से किए गए वादों को लेकर सरकार को घेर रहे हैं। भाजपा का कहना है कि प्रदेश की जनता कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का हिसाब लेगी। पार्टी नेताओं की ओर से यह भी कहा जा रहा है कि अगर भाजपा सत्ता में लौटती है तो मौजूदा सरकार के दौरान लिए गए फैसलों और योजनाओं की समीक्षा की जाएगी। यही मुद्दा अब कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी का नया आधार बनता जा रहा है।
कांग्रेस भी चुनावी मोड में
मुख्यमंत्री सुक्खू के बयान से साफ है कि कांग्रेस भी आने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गई है। पार्टी सरकार के कामकाज को जनता तक पहुंचाने के साथ-साथ भाजपा के भीतर चल रही कथित खींचतान को भी राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी में है। कांग्रेस का फोकस यह बताने पर है कि सरकार ने अपने कार्यकाल में क्या फैसले लिए और उनका प्रदेश की जनता पर क्या असर पड़ा। वहीं भाजपा सरकार की नीतियों और कामकाज को लेकर लगातार सवाल उठाकर सत्ता में वापसी का माहौल बनाने की कोशिश कर रही है।
टिकट को लेकर अभी से शुरू हुई चर्चा
हिमाचल प्रदेश में चुनावी राजनीति का एक बड़ा हिस्सा टिकट बंटवारे पर टिका रहता है। ऐसे में मुख्यमंत्री का भाजपा विधायकों के टिकट कटने का दावा राजनीतिक रूप से काफी मायने रखता है। अगर भाजपा वास्तव में अपने कई मौजूदा विधायकों के टिकट बदलती है तो इसका सीधा असर चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है। दूसरी ओर, अगर भाजपा के नेता कांग्रेस में आते हैं तो इससे दोनों दलों की चुनावी रणनीति प्रभावित हो सकती है। अभी तक भाजपा की ओर से ऐसे किसी बड़े टिकट बदलाव की आधिकारिक सूची सामने नहीं आई है। इसी तरह कांग्रेस के संपर्क में बताए जा रहे भाजपा नेताओं के नाम भी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
आने वाले दिनों में और गरमाएगी सियासत
हिमाचल प्रदेश में चुनावी माहौल बनने के साथ ही कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने के आसार हैं। एक तरफ भाजपा सरकार के फैसलों की समीक्षा और सत्ता में वापसी की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री सुक्खू भाजपा के भीतर चल रहे बदलावों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री के दावे पर भाजपा क्या जवाब देती है और क्या भाजपा की ओर से कांग्रेस के इन आरोपों को लेकर कोई पलटवार सामने आता है। फिलहाल इतना तय है कि हिमाचल की राजनीति में चुनाव से पहले ही टिकट, दलबदल और संगठन में बदलाव जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।

