आपने कहावत तो सुनी होगी “चोर के घर चोरी” बस ऐसा ही कुछ मामला सामने आया है। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से जुड़ा एक चोरी का मामला अब पुलिस महकमे में हड़कंप मचा चुका है। मामला उस समय और उलझ गया जब पता चला कि चोरी का माल असली चोरों के पास नहीं, बल्कि उत्तराखंड के कुछ सरकारी कर्मचारियों के कब्जे में पहुंच गया है। जानकारी के अनुसार, शिमला स्थित एक घर से करीब एक करोड़ रुपए मूल्य की ज्वेलरी और नकदी चोरी हुई थी। चोरी की इस वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी नेपाल भागने की फिराक में थे। रास्ते में जब वे उत्तराखंड के रुद्रपुर पहुंचे, तो वहां आबकारी विभाग की एक टीम ने उन्हें रोक लिया। चेकिंग के बहाने आबकारी टीम ने चोरों से पूरी ज्वेलरी और नकदी छीन ली और चोरों को छोड़ दिया।
हैरानी की बात यह रही कि इसके बावजूद असली चोर किसी तरह नेपाल पहुंचने में कामयाब हो गए। वहां पहुंचकर उन्होंने शिमला के उसी मकान मालिक को फोन किया, जिनके घर से उन लोगों ने चोरी की थी, और उन्हें बताया कि उनकी ज्वेलरी और कैश अब उत्तराखंड आबकारी विभाग की टीम के पास है। यह सुनकर मकान मालिक हैरान रह गए और उन्होंने तुरंत इसकी सूचना हिमाचल प्रदेश पुलिस को दी। सूचना मिलने के बाद हिमाचल पुलिस ने मामले की गहनता से जांच शुरू की। जांच में यह बात सही साबित हुई कि चोरी का माल वाकई उत्तराखंड आबकारी विभाग के कुछ कर्मचारियों के पास था। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रुद्रपुर आबकारी विभाग में तैनात दरोगा देवेंद्र कुमार, कांस्टेबल बलजीत सिंह, PRD जवान नईम और कर्मचारी पप्पू लाल को गिरफ्तार कर लिया है। और इनके पास से ज्वैलरी और केश की बरामद कर लिया है।
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पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों से करीब 80 प्रतिशत माल बरामद कर लिया गया है, जबकि असली चोर अब भी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है और जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसमें सरकारी कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आई है, जिन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए चेकिंग के नाम पर चोरी का माल हड़प लिया। इस घटना ने विभागीय जवाबदेही को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब लोग भी बोल रहे है कि चोर के घर चोरी हो गई। असली चोर फरार है लेकिन आबकारी विभाग के सरकारी मुलाजिम भी कम दोषी नहीं है।


