शिमला: हिमाचल प्रदेश में मानसून की बारिश का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। प्रदेश के कई जिलों में लगातार बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित है। जगह-जगह सड़कें बंद होने से आवाजाही मुश्किल हो गई है, वहीं बिजली और पेयजल आपूर्ति पर भी असर पड़ा है। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र की सोमवार, 7 सितंबर 2026 को सुबह 10 बजे जारी रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में 85 सड़कें बंद हैं। इसके साथ ही 59 बिजली वितरण ट्रांसफार्मर (DTR) बाधित हैं और छह पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं।

बारिश और भूस्खलन के कारण सबसे ज्यादा परेशानी मंडी और कुल्लू जिलों में सामने आई है। प्रशासन की ओर से बंद सड़कों को खोलने और प्रभावित बिजली-पानी की व्यवस्था बहाल करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इस मानसून सीजन में बारिश से जुड़ी घटनाओं में प्रदेश में अब तक 438 लोगों की मौत हो चुकी है।

मंडी में सबसे ज्यादा 36 सड़कें बंद

बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में मंडी शामिल है। यहां कुल 36 सड़कें बंद हैं। जिला स्तर की रिपोर्ट के मुताबिक इनमें सेराज क्षेत्र में 30, सुंदरनगर में एक, सरकाघाट में तीन और थलौट में दो सड़कें अवरुद्ध हैं। सड़कों के साथ-साथ बिजली व्यवस्था पर भी मंडी में बारिश का बड़ा असर पड़ा है। जिले में 40 बिजली ट्रांसफार्मर बाधित बताए गए हैं। इनमें अकेले जोगिंद्रनगर क्षेत्र में 35 ट्रांसफार्मर प्रभावित हैं। बिजली आपूर्ति बाधित होने से कई इलाकों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कुल्लू में 22 सड़कें बंद

कुल्लू जिले में भी बारिश और खराब मौसम के कारण सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। यहां कुल 22 सड़कें बंद हैं। इनमें कुल्लू उपमंडल की चार, बंजार की दो, आनी की 12 और निरमंड की चार सड़कें शामिल हैं। आनी में सबसे ज्यादा 12 सड़कें बंद होने से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में आवाजाही प्रभावित हुई है। निरमंड क्षेत्र में सड़कें बंद होने के साथ 10 बिजली ट्रांसफार्मर भी बाधित हैं। इससे क्षेत्र में बिजली व्यवस्था को बहाल करने के लिए प्रशासन और संबंधित विभाग के सामने चुनौती बनी हुई है।

कांगड़ा में सात सड़कें अवरुद्ध

कांगड़ा जिले में भी बारिश के कारण कई सड़कों पर आवाजाही प्रभावित हुई है। रिपोर्ट के अनुसार जिले में सात सड़कें बंद हैं। इनमें कांगड़ा उपमंडल की एक, शाहपुर की चार, पालमपुर की एक और देहरा की एक सड़क शामिल है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के दौरान भूस्खलन और सड़क पर मलबा आने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे में प्रशासन की ओर से लोगों को मौसम और सड़क की स्थिति को देखते हुए ही यात्रा करने की सलाह दी जा रही है।

किन्नौर में भी बारिश ने बढ़ाई मुश्किल

किन्नौर में भी बारिश के चलते सात सड़कें बंद हैं। इसके अलावा कल्पा क्षेत्र में सात बिजली ट्रांसफार्मर बाधित बताए गए हैं। रिपोर्ट में पुरवानी, काशंग इंटेक साइट और तेलंगी को प्रभावित क्षेत्रों में शामिल किया गया है। पहाड़ी जिलों में सड़कें बंद होने का असर सिर्फ यातायात पर नहीं पड़ता, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरी सामान की सप्लाई और लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही भी प्रभावित होती है। इसलिए प्रशासन के सामने प्राथमिकता के आधार पर सड़क संपर्क बहाल करने की चुनौती है।

बिजली और पेयजल व्यवस्था पर भी असर

बारिश का असर प्रदेश की बिजली और पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ा है। राज्य में कुल 59 बिजली ट्रांसफार्मर बाधित हैं। कई स्थानों पर बिजली के ढांचे को नुकसान पहुंचने या तकनीकी खराबी के कारण आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसके साथ ही प्रदेश की छह पेयजल योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के दौरान जलस्रोतों में गाद और मलबा आने तथा पाइपलाइन या इंटेक प्वाइंट प्रभावित होने से पेयजल आपूर्ति बाधित हो सकती है। प्रभावित योजनाओं को सामान्य स्थिति में लाने के लिए संबंधित विभाग काम कर रहे हैं।

मानसून में अब तक 438 लोगों की मौत

हिमाचल प्रदेश में इस मानसून सीजन के दौरान बारिश से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं में अब तक 438 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें भूस्खलन, बाढ़, सड़क हादसे और अन्य प्राकृतिक घटनाएं शामिल हैं। लगातार बारिश के कारण कई जिलों में प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है। प्रदेश की भौगोलिक स्थिति के कारण बारिश के दौरान सड़कें बंद होना बड़ी समस्या बन जाता है। कई जगह पहाड़ों से मलबा आने के कारण सड़कें कुछ समय के लिए पूरी तरह बंद हो जाती हैं। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

प्रशासन की नजर संवेदनशील इलाकों पर

राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र लगातार जिलों से स्थिति की जानकारी जुटा रहा है। जिन क्षेत्रों में सड़क, बिजली या पेयजल व्यवस्था प्रभावित हुई है, वहां संबंधित विभागों को जल्द से जल्द सेवाएं बहाल करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता बंद सड़कों को खोलना और प्रभावित इलाकों में बिजली-पानी की व्यवस्था सामान्य करना है। मौसम का मिजाज देखते हुए लोगों से सावधानी बरतने और बिना जरूरत जोखिम वाले पहाड़ी रास्तों पर जाने से बचने की अपील की जा रही है। प्रदेश में बारिश का दौर पूरी तरह थमने तक लोगों की मुश्किलें बनी रह सकती हैं। ऐसे में स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी मौसम और सड़क संबंधी अपडेट पर नजर रखना जरूरी होगा।

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