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कर्नाटक की सियासत में ढाई साल बाद बड़ा बदलाव हो गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पद से इस्तीफा दे दिया है और अब प्रदेश को नया नेतृत्व मिलने जा रहा है। इस्तीफे के ठीक एक दिन बाद शुक्रवार को सिद्धारमैया दिल्ली पहुंचे। यहां उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की। इस मुलाकात को नई कैबिनेट के फॉर्मूले और मंत्रियों के नाम तय करने से जोड़कर देखा जा रहा है। कर्नाटक में अब डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली में हुई बैठक में सिद्धारमैया ने हाईकमान के सामने अपनी कई मांगें रखीं। सबसे अहम मांग उनके बेटे यतींद्र सिद्धारमैया को नई कैबिनेट में महत्वपूर्ण मंत्रालय देने की बताई जा रही है। यतींद्र अभी विधायक हैं और पिछली सरकार में भी उनकी भूमिका को लेकर चर्चा होती रही है। सिद्धारमैया चाहते हैं कि नई सरकार में उनके समर्थकों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले। पार्टी सूत्रों ने पुष्टि की है कि सिद्धारमैया का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। डीके शिवकुमार अगले हफ्ते नए मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। शपथ ग्रहण की तारीख जल्द तय होगी। सरकार में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए 4 डिप्टी CM भी बनाए जा सकते हैं। यह फॉर्मूला 2023 में हुए सत्ता समझौते का हिस्सा था, जिसमें ढाई-ढाई साल CM पद का फैसला हुआ था।पार्टी सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री के साथ-साथ पूरी कैबिनेट भी बदलेगी। मौजूदा कैबिनेट से करीब 10 मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। नए मंत्रियों की लिस्ट में सिद्धारमैया का दबदबा साफ दिखेगा। दावा किया जा रहा है कि डिप्टी CM और अहम विभाग वाले मंत्री सिद्धारमैया की पसंद के होंगे। इन्हीं नामों पर मुहर लगवाने के लिए वे खुद दिल्ली पहुंचे हैं। उनके साथ-साथ डीके शिवकुमार भी दिल्ली में मौजूद हैं। दोनों नेताओं ने खरगे और राहुल गांधी से अलग-अलग और संयुक्त मुलाकात की। नए सत्ता समीकरण में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे और राज्य कैबिनेट में मंत्री प्रियंक खरगे को भी डिप्टी CM बनाया जा सकता है। इनके अलावा दो और डिप्टी CM होंगे। एक नाम लिंगायत समुदाय से और एक दलित या पिछड़ा वर्ग से हो सकता है। कांग्रेस जातीय संतुलन के जरिए 2028 के विधानसभा चुनाव की जमीन तैयार करना चाहती है। सिद्धारमैया गुट को वित्त, गृह, राजस्व जैसे बड़े विभाग मिलने की संभावना है, जबकि डीके शिवकुमार अपने पास सिंचाई और बेंगलुरु विकास जैसे मंत्रालय रख सकते हैं।यह पहला मौका नहीं है जब किसी राज्य में एक साथ इतने डिप्टी CM बनाए जाएंगे। 2019 में आंध्र प्रदेश के पूर्व CM जगन मोहन रेड्डी ने 5 डिप्टी CM के साथ शपथ ली थी। वहां SC, ST, BC, माइनॉरिटी और कापू समुदाय को प्रतिनिधित्व दिया गया था। कर्नाटक में भी कांग्रेस SC-लेफ्ट, SC-राइट, लिंगायत, वोक्कालिगा और माइनॉरिटी फैक्टर को साधने के लिए 4 डिप्टी CM का फॉर्मूला अपना सकती है।सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद कर्नाटक कांग्रेस में हलचल तेज है। मौजूदा मंत्रियों में जिनका परफॉर्मेंस कमजोर रहा या जो विवादों में रहे, उनका पत्ता कटना तय माना जा रहा है। वहीं सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार, दोनों खेमों के विधायकों को एडजस्ट करने की चुनौती भी हाईकमान के सामने है। मंत्रिमंडल विस्तार में उत्तर कर्नाटक, तटीय कर्नाटक और हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र को बराबर हिस्सेदारी देने की कोशिश होगी। कर्नाटक में सत्ता हस्तांतरण अब अंतिम दौर में है। सिद्धारमैया ने बिना किसी विवाद के कुर्सी छोड़ी और हाईकमान के फैसले को माना, इससे पार्टी में अनुशासन का संदेश गया है। अब डीके शिवकुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती पांच गारंटी योजनाओं को जारी रखने के साथ-साथ संगठन और सरकार में तालमेल बिठाने की होगी। 4 डिप्टी CM का प्रयोग सफल रहा तो यह कांग्रेस के लिए दक्षिण भारत में नया सोशल इंजीनियरिंग मॉडल बन सकता है। अगले हफ्ते शपथ के बाद साफ होगा कि नई कैबिनेट में किसका कितना दबदबा रहता है और सिद्धारमैया की ‘डिमांड लिस्ट’ पर हाईकमान ने कितनी मुहर लगाई। फिलहाल दिल्ली से बेंगलुरु तक सबकी नजरें राजभवन की ओर टिकी हैं।

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