NEET 2026 पेपर लीक मामले में गिरफ्तार आरोपी दिनेश बिवाल को लेकर अब नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी SOG ने दिनेश बिवाल को पेपर लीक मामले में गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर एक पुरानी फेसबुक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है। इस पोस्ट को जमवारामगढ़ से बीजेपी विधायक महेंद्र पाल मीणा के फेसबुक अकाउंट से जुड़ा बताया जा रहा है। पोस्ट में दिनेश बिवाल को “बीजेपी का ऊर्जावान कार्यकर्ता” बताया गया था। इसी वजह से अब यह मामला सिर्फ जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बहस का मुद्दा भी बन गया है।
गिरफ्तारी के बाद वायरल हुई पुरानी पोस्ट
रिपोर्ट के मुताबिक, दिनेश बिवाल की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर जमवारामगढ़ विधायक महेंद्र पाल मीणा की एक पुरानी फेसबुक पोस्ट सामने आई। इस पोस्ट में विधायक ने दिनेश बिवाल को शादी की सालगिरह की शुभकामनाएं दी थीं। पोस्ट में दिनेश को बीजेपी का ऊर्जावान कार्यकर्ता बताया गया था। इसके साथ दिनेश और विधायक की तस्वीर भी साझा की गई थी। अब SOG की कार्रवाई के बाद यही पोस्ट चर्चा में आ गई है और सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही है।
आरोपी दिनेश बिवाल को लेकर क्या दावा है?

Aaj Tak की रिपोर्ट के अनुसार, दिनेश बिवाल उन आरोपियों में शामिल है, जिन पर NEET 2026 का पेपर खरीदने और आगे सप्लाई करने का आरोप है। जांच एजेंसियों का दावा है कि पेपर कथित तौर पर गुरुग्राम के एक डॉक्टर से खरीदा गया था। इसके बाद इसे राजस्थान समेत कई राज्यों में अभ्यर्थियों तक पहुंचाने का नेटवर्क तैयार किया गया। इस दावे के बाद पेपर लीक केस की जांच का दायरा और बड़ा हो गया है।
कई राज्यों तक जुड़ रहे कनेक्शन
जांच में राजस्थान के अलावा हरियाणा, महाराष्ट्र और केरल तक के कनेक्शन सामने आने की बात कही गई है। SOG अब इस बात की जांच कर रही है कि पेपर किन-किन लोगों तक पहुंचा, इसके बदले कितनी रकम ली गई और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह गिरोह संगठित तरीके से काम कर रहा था। आरोप है कि लाखों रुपये लेकर अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए जाते थे।
आर्थिक लेनदेन और मोबाइल चैट की जांच
पेपर लीक नेटवर्क को समझने के लिए SOG आर्थिक लेनदेन, मोबाइल चैट और आरोपियों के संपर्कों की जांच कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पेपर खरीदने से लेकर उसे आगे पहुंचाने तक किसने क्या भूमिका निभाई। मोबाइल चैट और पैसों के लेनदेन से जांच को नई दिशा मिल सकती है। इससे यह भी साफ हो सकता है कि इस नेटवर्क में केवल आरोपी दिनेश बिवाल ही शामिल था या इसके पीछे और लोग भी सक्रिय थे।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
दिनेश बिवाल से जुड़ी वायरल फेसबुक पोस्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने बीजेपी पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। विपक्ष का आरोप है कि पेपर लीक जैसे गंभीर मामलों में राजनीतिक संरक्षण की भी जांच होनी चाहिए। पोस्ट में दिनेश को बीजेपी कार्यकर्ता बताए जाने के बाद यह मामला और संवेदनशील हो गया है। हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी की ओर से अब तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
SOG बोली, सबूतों के आधार पर आगे बढ़ रही जांच
SOG का कहना है कि जांच पूरी तरह सबूतों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। एजेंसी के अनुसार, किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल थे और पेपर किन-किन राज्यों तक पहुंचाया गया। दिनेश बिवाल की गिरफ्तारी के बाद वायरल पोस्ट ने मामले को राजनीतिक रंग जरूर दे दिया है, लेकिन जांच एजेंसी का फोकस फिलहाल पेपर लीक नेटवर्क की पूरी कड़ी को सामने लाने पर है।


