आगरा में सावन के दूसरे सोमवार से पहले शिवभक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। रविवार शाम से ही हजारों श्रद्धालु 44 किलोमीटर लंबी नगर परिक्रमा के लिए सड़कों पर निकल पड़े। किसी के पैरों में घुंघरू थे तो किसी के हाथ में जल से भरा लोटा। गर्मी, उमस, कंकड़-पत्थरों और लंबी दूरी की थकान भी भक्तों के कदम नहीं रोक सकी। पूरी रात शहर की सड़कों पर सिर्फ एक ही जयकारा सुनाई देता रहा ‘हर-हर महादेव।’

44 किमी की परिक्रमा का अद्भुत दृश्य

नंगे पैर निकले शिवभक्त, हर कदम पर दिखी आस्था

सावन के दूसरे सोमवार की सुबह से पहले आगरा में शिवभक्ति का ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। रविवार शाम ढलते ही शहर की सड़कों पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी। हजारों शिवभक्त भगवान भोलेनाथ के प्रमुख शिवालयों की 44 किलोमीटर लंबी नगर परिक्रमा के लिए अपने घरों से निकले। कई श्रद्धालु नंगे पैर ही इस कठिन यात्रा पर निकल पड़े। पैरों के नीचे सड़क की गर्मी, रास्ते में पड़े कंकड़-पत्थर और लगातार चलने से होने वाली थकान के बावजूद उनके चेहरे पर उत्साह कम नहीं हुआ।

नंगे पैर निकले शिवभक्त, हर कदम पर दिखी आस्था

हर कुछ कदम पर ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारे वातावरण में गूंज रहे थे। किसी श्रद्धालु ने माथे पर त्रिपुंड लगाया हुआ था तो कोई भगवान शिव की तस्वीर वाली टी-शर्ट पहने नजर आया। कई भक्तों के हाथों में जल से भरे लोटे थे। वहीं कुछ श्रद्धालु पैरों में घुंघरू बांधकर परिक्रमा करते दिखाई दिए। आस्था और भक्ति से भरी यह यात्रा रातभर जारी रही।

12 साल के बच्चे से लेकर 60 साल तक के श्रद्धालु हुए शामिल

इस नगर परिक्रमा की सबसे खास बात यह रही कि इसमें अलग-अलग उम्र के लोग शामिल हुए। करीब 12 साल के बच्चों से लेकर 60 वर्ष तक के श्रद्धालु भगवान शिव की भक्ति में कदम से कदम मिलाते नजर आए। कई परिवारों ने एक साथ परिक्रमा की। बच्चे अपने माता-पिता के साथ चलते रहे तो बुजुर्ग भी अपनी क्षमता के अनुसार इस धार्मिक यात्रा का हिस्सा बने। कुछ लोग समूह बनाकर भजन और शिव के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे। श्रद्धालुओं के लिए यह सिर्फ 44 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली यात्रा नहीं थी, बल्कि भगवान शिव के प्रति उनकी आस्था, विश्वास और समर्पण का प्रतीक थी।

12 साल के बच्चे से लेकर 60 साल तक के श्रद्धालु हुए शामिल

गर्मी और उमस भी नहीं रोक पाई भक्तों के कदम

रविवार को मौसम में गर्मी और उमस बनी हुई थी। ऐसे मौसम में इतनी लंबी दूरी पैदल तय करना किसी चुनौती से कम नहीं था। इसके बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। कई लोग नंगे पैर चलते हुए अपने पैरों की तकलीफ को भूलकर सिर्फ महादेव का नाम लेते रहे। जैसे-जैसे रात गहराती गई, वैसे-वैसे परिक्रमा में शामिल श्रद्धालुओं की आस्था और भी मजबूत दिखाई दी। कहीं लोग ‘हर-हर महादेव’ का उद्घोष कर रहे थे तो कहीं शिव भजनों की आवाज सुनाई दे रही थी। पूरी रात आगरा की सड़कों पर धार्मिक उत्साह का माहौल बना रहा।

राजेश्वर महादेव से पृथ्वीनाथ तक, प्रमुख शिवालयों की परिक्रमा

आगरा की इस पारंपरिक नगर परिक्रमा में शहर के प्रमुख शिवालयों का विशेष महत्व है। श्रद्धालु राजेश्वर महादेव, पृथ्वीनाथ महादेव, कैलाश और बल्केश्वर महादेव समेत प्रमुख शिव मंदिरों की परिक्रमा करते हुए आगे बढ़े। हर मंदिर के साथ भक्तों की आस्था और उत्साह और बढ़ता गया। कई श्रद्धालु मंदिरों के आसपास रुककर भगवान शिव को नमन करते और फिर अपनी यात्रा आगे जारी रखते रहे। मान्यता है कि सावन के सोमवार के अवसर पर भगवान शिव की आराधना और शिवालयों की परिक्रमा का विशेष धार्मिक महत्व है। यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस परिक्रमा में हिस्सा लेते हैं।

राजेश्वर महादेव से पृथ्वीनाथ तक, प्रमुख शिवालयों की परिक्रमा

पैरों में घुंघरू, माथे पर त्रिपुंड और जुबां पर महादेव

इस धार्मिक यात्रा की तस्वीरें अपने आप में भक्ति की कहानी बयां कर रही थीं। किसी के माथे पर चंदन और त्रिपुंड था, किसी के गले में रुद्राक्ष की माला थी और किसी के हाथ में शिवलिंग के लिए जल से भरा लोटा। कई श्रद्धालुओं ने अपने पैरों में घुंघरू बांध रखे थे। चलते समय घुंघरुओं की आवाज और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे मिलकर पूरे माहौल को भक्तिमय बना रहे थे। कुछ श्रद्धालु रास्ते में एक-दूसरे का हौसला बढ़ाते दिखाई दिए। किसी का पैर थकने लगा तो साथ चल रहे लोगों ने उसे सहारा दिया। कहीं श्रद्धालु पानी पीकर कुछ देर आराम करते नजर आए तो कहीं समूह के लोग भजन गाते हुए अपनी थकान भूलते रहे।

रातभर चलता रहा आस्था का कारवां

जैसे-जैसे रात आगे बढ़ी, शहर की सड़कों पर अंधेरा गहराता गया, लेकिन शिवभक्तों का कारवां थमा नहीं। हजारों कदम लगातार अपनी मंजिल की ओर बढ़ते रहे। कई श्रद्धालु परिवार के साथ निकले थे तो कई दोस्तों और धार्मिक समूहों के साथ परिक्रमा कर रहे थे। हर किसी के मन में एक ही भावना थी, महादेव की भक्ति और सावन के इस पवित्र अवसर को अपने तरीके से यादगार बनाना। थकान के बावजूद श्रद्धालुओं के चेहरे पर संतोष नजर आया। कई लोगों के पैरों में दर्द था, लेकिन महादेव का नाम लेते हुए वे आगे बढ़ते रहे।

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सोमवार को शिवालयों में होगा जलाभिषेक

44 किलोमीटर लंबी नगर परिक्रमा के बाद सोमवार को श्रद्धालु शहर के प्रमुख शिवालयों में पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। हाथों में जल लेकर मंदिर पहुंचने वाले भक्त भोलेनाथ का पूजन करेंगे और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। सावन के दूसरे सोमवार के कारण शिव मंदिरों में भी सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। कई भक्तों ने रातभर नगर परिक्रमा पूरी करने के बाद सीधे मंदिर पहुंचकर जल चढ़ाने की तैयारी की है।

सोमवार को शिवालयों में होगा जलाभिषेक

आस्था के आगे छोटी पड़ गई 44 किलोमीटर की दूरी

आगरा में हुई यह नगर परिक्रमा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था और संकल्प की तस्वीर बनकर सामने आई। 44 किलोमीटर की लंबी दूरी, नंगे पैर चलना, गर्मी-उमस और रातभर की थकान, इन सबके बावजूद भक्तों के कदम लगातार आगे बढ़ते रहे।किसी के लिए यह परंपरा थी, किसी के लिए मनोकामना, तो किसी के लिए महादेव के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर।

सोमवार को शिवालयों में होगा जलाभिषेक

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लेकिन सभी के चेहरे पर एक ही भाव नजर आया, ‘महादेव हैं तो सब संभव है।’ आगरा की सड़कों पर रातभर गूंजता ‘हर-हर महादेव’ का जयघोष इस बात की गवाही देता रहा कि सावन में शिवभक्ति का रंग कितना गहरा होता है। जैसे-जैसे सुबह हुई, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं का कारवां शिवालयों की ओर बढ़ता गया और पूरा शहर भोलेनाथ की भक्ति में डूबा नजर आया।

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