कुशीनगर: यूपी के कुशीनगर (Kushinagar) में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत ने सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी अस्पतालों में ओपीडी का समय सुबह 8 बजे से शुरू होता है लेकिन 9 बजे के बाद भी कई अस्पतालों में डॉक्टर अपने कैबिन से नदारद मिले। नेशन 27 की पड़ताल में कहीं मरीज डॉक्टर का इंतजार करते मिले, तो कहीं डॉक्टर के चेंबर पर ताला लटका मिला। कहीं कर्मचारी मौजूद थे, लेकिन डॉक्टर गायब थे और गांवों में बने हेल्थ सेंटर तो बंद ही मिले।

डॉक्टर के इंतजार में बैठे रहे मरीज

सुबह 9 बजे के बाद नेशन 27 की टीम पहुंची पडरौना के पुराने और प्रमुख पुरुष नेत्र अस्पताल। अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर दो दर्जन से ज्यादा मरीज ओपीडी की पर्ची लेकर डॉक्टरों के इंतजार में बैठे थे। पड़ताल के दौरान प्रभारी डॉक्टर भी अपने कक्ष में मौजूद नहीं मिले। कुछ ओपीडी कक्षों के दरवाजे बंद मिले। मरीजों का कहना था कि वो समय से अस्पताल पहुंच गए, लेकिन डॉक्टरों के इंतजार में काफी समय बीत गया।

मरीजों की परेशानी यहीं खत्म नहीं हुई। कुबेरस्थान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी सुबह 9 बजे के बाद प्रभारी डॉक्टर समेत कई डॉक्टर अपने चेंबर में मौजूद नहीं मिले। हालांकि फार्मासिस्ट, पर्ची काउंटर, दवा वितरण और एक्स-रे कक्ष में कर्मचारी मौजूद मिले।

डॉक्टरों के इंतजार में मरीज चेंबर के बाहर बैठे रहे। कुछ देर बाद पहुंचे मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर उमेश मौर्य ने बताया कि वह रात से इमरजेंसी ड्यूटी में तैनात हैं और अन्य डॉक्टरों के आने की बात कही।

वहीं कप्तानगंज ब्लॉक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बलुआ में चार कर्मचारियों की तैनाती बताई गई है। नेशन 27 की पड़ताल के दौरान यहां डॉक्टर, फार्मासिस्ट और वार्ड बॉय मौजूद नहीं मिले। मौके पर मौजूद मल्टी टास्किंग स्टाफ से जब डॉक्टरों की मौजूदगी को लेकर सवाल किया गया, तो जवाब भी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता नजर आया।

डॉक्टर के चेंबर पर ताला

तमकुही ब्लॉक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तुर्कपट्टी में डॉक्टर के चेंबर पर ताला लगा मिला जबकि वहां अन्य कर्मचारी मौजूद थे। मौके पर मौजूद कर्मचारियों के मुताबिक डॉक्टर छुट्टी पर हैं। वहीं तुर्कपट्टी के राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में डॉक्टर की तैनाती नहीं होने की वजह से अस्पताल फार्मासिस्ट के भरोसे चलता मिला।

वहीं पडरौना ब्लॉक के बरवा कला स्थित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर भी नेशन 27 की टीम पहुंची। यहां सेंटर के गेट पर ताला बंद मिला। सेंटर के आसपास जलजमाव और गंदगी भी नजर आई। यानी सवाल सिर्फ डॉक्टरों की मौजूदगी का नहीं, सवाल उस व्यवस्था का है, जहां इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले मरीजों को कभी डॉक्टर का इंतजार करना पड़ रहा है, तो कहीं बंद दरवाजा मिल रहा है।

रिपोर्ट: राजकुमार गिरी

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