अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में पहली बार बनाए गए मुख्य कार्यकारी अधिकारी CEO के पद पर हुई नियुक्ति अब विवादों के घेरे में आ गई है। पूर्व आईपीएस अधिकारी और आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने इस चयन प्रक्रिया पर सीधे सवाल खड़े करते हुए ट्रस्ट से स्पष्टीकरण मांगा है।

ठाकुर ने ट्रस्ट को भेजे अपने पत्र में एक और पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडे के पॉडकास्ट में दिए गए बयान का हवाला दिया है। इस बयान के मुताबिक रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र ना तो अंतिम 16 उम्मीदवारों की सूची में शामिल थे और न ही उन्होंने चयन प्रक्रिया के तहत कोई साक्षात्कार दिया था। इसके बावजूद उनका नाम अंतिम तीन दावेदारों में कैसे पहुंचा, यही सवाल अब सबसे ज्यादा चर्चा में है।

अमिताभ ठाकुर ने कहा है कि यह मामला उनकी निजी उम्मीदवारी से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह पारदर्शिता और नियमों के पालन का विषय है। उन्होंने ट्रस्ट से मांग की है कि चयन समिति द्वारा अपनाई गई पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाए और यह भी बताया जाए कि अंतिम निर्णय किस आधार पर लिया गया। साथ ही उन्होंने यह चेतावनी भी दी है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो वे इस पूरे मामले को अदालत में चुनौती देने से पीछे नहीं हटेंगे।

गौरतलब है कि ट्रस्ट में CEO पद चढ़ावे की चोरी से जुड़े विवाद के बाद सामने आया था, ताकि प्रशासनिक कामकाज और वित्तीय व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाया जा सके। इस पद के लिए देशभर से एक हजार से अधिक लोगों ने आवेदन किया था, जिनमें रिटायर्ड नौकरशाहों की संख्या सबसे ज्यादा थी। खुद अमिताभ ठाकुर भी इस पद के लिए आवेदकों में शामिल थे।

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दूसरी ओर, राजेश पांडे की टीम ने अपने बयान को गलत तरीके से पेश किए जाने की बात कही है और स्पष्ट किया है कि उनके कथन का आशय कुछ और था। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट इस पूरे विवाद पर क्या रुख अपनाता है और क्या चयन प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए जाते हैं या नहीं? जब तक ट्रस्ट की ओर से पूरी बात साफ नहीं होती, तब तक यह विवाद थमता नहीं दिख रहा।

रिपोर्ट- सोनू सिंह

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