अचानक सुर्खियों में आये अविनाश पांडेय 2015 बैच के आईपीएस अफसर हैं। उन्‍होंने पांच महीने पहले मेरठ एसएसपी के रूप में पदभार ग्रहण किया है। अविनाश पांडे वो अधिकारी हैं जिन्होंने मेरठ में 40 से ज्यादा लोगों को ज़िन्दा जलने से बचाया था।

बात 2019 की है जब एनआरसी को लेकर अधिकांश जिलों में आगजनी और हंगामा चल रहा था। उस समय अविनाश पांडे तैनात मेरठ में तैनात थे। उनकी ड्यूटी हापुड़ रोड पर थी। उस समय अविनाश पांडे को सूचना मिली कि, एक दुकान का शटर बंद कर के 40 से अधिक रंगूटों और कुछ अन्य लोगों को कैद किया हुआ है।

उसमें एक पत्रकार भी शामिल था। दुकान को आंदोलनकारी दुकान को आग के हवाले करने की तैयारी कर चुके थे और पहले एक दो प्रयास में आग नहीं लगी थी। अविनाश पांडे उस समय पर अकेले पड़ गए। क्योंकि बाकी फोर्स आंदोलनकारियों से डर कर पीछे हट गई थी। अविनाश पांडे दुकान में फंसे लोगों की जान बचाने के लिए आगे बढ़ते चले गए।

अविनाश पांडे जानते थे कि सामने से पत्थर फेंके जा रहे है और आंदोलन के बीच में उपद्रवी गोली चला रहे हैं। अविनाश लाउड स्पीकर लेकर आंदोलनकारियों को चेतावनी देते हुए समझाने का प्रयास करते हुए आगे बढते चले गए। उनकी हिम्मत देख कर कुछ फोर्स उनके साथ चलने को तैयार हो गई।

आंदोलनकारी तब तक एक टायर में आग लगा चुके थे बस वो दुकान के अंदर फेंक नहीं सके, इतने में अविनाश पांडे ने आकर उनकी जान बचाई। इस घटना के बाद उनके विभाग में काफी तारीफ हुई। इसके कुछ साल बाद मुख्तार अंसारी मामले में भी उनका खास योगदान रहा है। एक ही दिन में 40 कबूतर बाजो पर मुकदमा दर्ज किया गया। अब एक बार फिरसे अविनाश पांडे चर्चाओं में हैं।

रिपोर्ट- अनमोल शर्मा (ब्यूरो वेस्ट यूपी)/सोनू सिंह

 

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