उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती में आंगनबाड़ी केंद्रों पर नौनिहालों के निवाले में बड़े फर्जीवाड़े और लापरवाही का खुलासा हुआ है। ‘हॉट कुक्ड फूड योजना’ के तहत लाखों रुपयों के गोलमाल की शिकायत पर जब जांच कराई गई, तो अफसरों की घोर लापरवाही सामने आई है। न तो बच्चों के भोजन की समुचित व्यवस्था की गई और न ही रसोइयों का मानदेय समय पर दिया गया। जांच में दोषी पाए गए जिला कार्यक्रम अधिकारी और सीडीपीओ पर अब कड़ी कार्रवाई की तैयारी है।
समाजसेवी मनोज पाठक ने जिलाधिकारी से शिकायत कर आंगनबाड़ी केंद्रों पर चल रही हॉट कुक्ड फूड योजना में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जब जिला विकास अधिकारी रामसमुझ की अगुवाई में जांच टीम गठित हुई, तो परत-दर-परत सच्चाई सामने आ गई।
जिले के 739 को-लोकेटेड और 187 नान-कोलोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों पर संचालित इस योजना के लिए वित्तीय वर्ष में बजट तो जारी हुआ, लेकिन न तो खाद्यान्न के उठान का सही रिकॉर्ड रखा गया और न ही उपलब्ध धनराशि का शत-प्रतिशत सही उपयोग किया गया। 15 मई तक रसोइयों और सहायिकाओं के पारिश्रमिक का भुगतान तक नहीं हुआ था।
जांच टीम ने इसके लिए सीधे तौर पर बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) और जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) को जिम्मेदार ठहराते हुए रिपोर्ट मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) शाहिद अहमद को सौंप दी है। जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी गई है। अब देखना होगा कि बच्चों के हक पर डाका डालने वाले इन जिम्मेदार अधिकारियों पर प्रशासन क्या सख्त एक्शन लेता है।
रिपोर्ट- मनोज कुमार मिश्रा/सोनू सिंह (श्रावस्ती)


