वाराणसी: धार्मिक और पर्यटन नगरी वाराणसी अब अंतरराष्ट्रीय क्रूज पर्यटन के क्षेत्र में भी बड़ा कदम बढ़ाने जा रही है। गंगा किनारे सामनेघाट में प्रदेश का पहला अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल विकसित करने की तैयारी है। इस प्रोजेक्ट पर करीब 200 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजना है। टर्मिनल तैयार होने के बाद वाराणसी से आने-जाने वाले विदेशी पर्यटकों के लिए सुविधाएं बढ़ेंगी और गंगा के रास्ते अंतरराष्ट्रीय स्तर की क्रूज कनेक्टिविटी को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
प्रस्तावित टर्मिनल को इस तरह विकसित किया जाएगा कि एक समय में करीब 10 हजार यात्रियों को संभालने की क्षमता हो। यहां यात्रियों के आगमन से लेकर सुरक्षा जांच, इमिग्रेशन और कस्टम्स की प्रक्रिया तक के लिए जरूरी इंतजाम किए जाएंगे। इससे वाराणसी को अंतरराष्ट्रीय क्रूज पर्यटन के बड़े केंद्र के तौर पर विकसित करने की कोशिश को गति मिल सकती है।
सामनेघाट में विकसित होगा आधुनिक टर्मिनल
गंगा के किनारे सामनेघाट में बनने वाला यह टर्मिनल सामान्य यात्री घाट से अलग आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। इसका मकसद सिर्फ क्रूज यात्रियों को उतरने और चढ़ने की सुविधा देना नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए एयरपोर्ट जैसी जरूरी प्रक्रियाओं को एक ही जगह उपलब्ध कराना है। टर्मिनल में यात्रियों के लिए इमिग्रेशन और कस्टम्स काउंटर बनाए जाएंगे।
विदेश से आने वाले यात्रियों के दस्तावेजों की जांच और अन्य औपचारिकताएं यहीं पूरी की जा सकेंगी। इससे क्रूज के जरिए वाराणसी पहुंचने वाले विदेशी पर्यटकों को शहर में प्रवेश से पहले जरूरी प्रक्रियाओं के लिए अलग-अलग जगह जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
सुरक्षा पर भी रहेगा खास फोकस
अंतरराष्ट्रीय स्तर के टर्मिनल को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत रखने की योजना है। परिसर में डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर, बैगेज स्कैनर और सुरक्षा जांच काउंटर लगाए जाएंगे। यात्रियों और उनके सामान की जांच के लिए अलग व्यवस्था होगी। पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी। किसी भी तरह की आपात स्थिति या जरूरी सूचना यात्रियों तक पहुंचाने के लिए पब्लिक एड्रेस सिस्टम भी लगाया जाएगा। इससे टर्मिनल के भीतर यात्रियों की आवाजाही को व्यवस्थित करने और सुरक्षा एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय में मदद मिलेगी।
10 हजार यात्रियों को संभालने की क्षमता
प्रस्तावित टर्मिनल की सबसे बड़ी खासियत इसकी यात्री क्षमता होगी। सामनेघाट में विकसित होने वाली सुविधा को करीब 10 हजार यात्रियों की क्षमता को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा। इससे आने वाले वर्षों में बड़े क्रूज जहाजों और ज्यादा संख्या में पर्यटकों के वाराणसी पहुंचने की संभावना को देखते हुए आधारभूत ढांचा तैयार किया जा सकेगा।
वाराणसी पहले से ही देश-विदेश के पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण है। काशी विश्वनाथ मंदिर, गंगा घाट, सारनाथ और शहर की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं। ऐसे में क्रूज पर्यटन को बढ़ावा मिलने पर पर्यटकों के लिए एक नया अनुभव जुड़ सकता है।
व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद
अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल का असर सिर्फ पर्यटन तक सीमित रहने की उम्मीद नहीं है। इससे स्थानीय कारोबार को भी फायदा मिलने की संभावना है। क्रूज से आने वाले पर्यटकों के चलते होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी, टूर गाइड, हस्तशिल्प, बनारसी साड़ी और दूसरे स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ सकती है। वाराणसी के छोटे दुकानदारों, नाव संचालकों, स्थानीय गाइड, परिवहन से जुड़े लोगों और पर्यटन क्षेत्र में काम करने वाले युवाओं के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर स्थानीय हस्तशिल्प और बनारसी उत्पादों को भी बड़े बाजार तक पहुंचाने का मौका मिल सकता है।
काशी की अर्थव्यवस्था को मिल सकता है फायदा
वाराणसी की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की पहले से बड़ी हिस्सेदारी है। शहर में आने वाले पर्यटक धार्मिक स्थलों के साथ स्थानीय बाजारों और खानपान पर भी खर्च करते हैं। क्रूज पर्यटन का विस्तार होने पर पर्यटकों के शहर में ठहरने और स्थानीय सेवाओं का इस्तेमाल करने की अवधि बढ़ सकती है। अगर अंतरराष्ट्रीय क्रूज नियमित रूप से वाराणसी तक पहुंचने लगते हैं तो इसका फायदा पर्यटन से जुड़े अलग-अलग कारोबारों को मिल सकता है। क्रूज यात्रियों के लिए स्थानीय टूर पैकेज, गाइडेड टूर और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मांग भी बढ़ सकती है।
अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए आसान होगी एंट्री
टर्मिनल में इमिग्रेशन और कस्टम्स जैसी सुविधाएं होने से विदेशी यात्रियों की प्रक्रिया ज्यादा व्यवस्थित हो सकेगी। अभी क्रूज पर्यटन को बढ़ाने के लिए सबसे बड़ी जरूरत ऐसी सुविधाओं की है, जहां अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की औपचारिकताएं एक तय व्यवस्था के तहत पूरी की जा सकें। सामनेघाट में प्रस्तावित टर्मिनल इसी जरूरत को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यहां यात्रियों के लिए प्रवेश, सुरक्षा जांच, सामान की स्क्रीनिंग और अन्य प्रक्रियाओं को एक ही परिसर में रखने की योजना है।
गंगा पर्यटन को भी मिलेगा नया विस्तार
वाराणसी में गंगा पहले से ही पर्यटन का सबसे बड़ा आकर्षण है। घाटों की रौनक और गंगा आरती देखने के लिए देश-दुनिया से लोग यहां पहुंचते हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल बनने के बाद गंगा आधारित पर्यटन को एक नया बाजार मिल सकता है। क्रूज यात्राओं के जरिए पर्यटक वाराणसी के साथ गंगा से जुड़े दूसरे पर्यटन स्थलों तक भी पहुंच सकेंगे। इससे नदी पर्यटन का दायरा बढ़ाने और आसपास के शहरों को पर्यटन नेटवर्क से जोड़ने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
प्रदेश के लिए बनेगा नया अंतरराष्ट्रीय पर्यटन गेटवे
वाराणसी में बनने वाला यह टर्मिनल उत्तर प्रदेश के लिए भी खास माना जा रहा है, क्योंकि इससे राज्य को अंतरराष्ट्रीय जल पर्यटन के नक्शे पर मजबूत पहचान मिल सकती है। अभी वाराणसी की पहचान मुख्य रूप से धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के लिए है। क्रूज टर्मिनल बनने के बाद इसमें अंतरराष्ट्रीय जल पर्यटन की एक नई कड़ी जुड़ जाएगी। करीब 200 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट से सिर्फ एक टर्मिनल तैयार नहीं होगा, बल्कि इसके आसपास पर्यटन से जुड़ा पूरा इकोसिस्टम विकसित होने की उम्मीद है। होटल, परिवहन, खानपान, स्थानीय बाजार, टूर ऑपरेटर और हस्तशिल्प क्षेत्र को इसका सीधा या अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है।
काशी में पर्यटन का नया अध्याय
वाराणसी लगातार बदलते पर्यटन ढांचे के साथ अपनी पारंपरिक पहचान को नए रूप में पेश कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल की योजना इसी बदलाव की अगली कड़ी है। यदि प्रस्तावित सुविधाएं तय योजना के अनुसार विकसित होती हैं और क्रूज संचालन का नेटवर्क मजबूत होता है, तो आने वाले समय में काशी में विदेशी पर्यटकों की आवाजाही बढ़ सकती है। सामनेघाट में तैयार होने वाला यह टर्मिनल वाराणसी को गंगा के रास्ते अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों से जोड़ने का माध्यम बनेगा। 200 करोड़ रुपये की प्रस्तावित लागत और 10 हजार यात्रियों की क्षमता वाला यह प्रोजेक्ट पर्यटन के साथ व्यापार और रोजगार के लिहाज से भी शहर के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है।

