बाघ सामान्यतया मैदानी क्षेत्रों में रहना पसंद करता है। यही उसका प्राकृतिक आवास माना जाता है और यहां उसे शिकार के लिए पर्याप्त संख्या में शाकाहारी वन्यजीव भी आसानी से मिल जाते हैं। जो उसके भोजन के लिए आवश्यक हैं। ऐसे में बाघों का पहाड़ों की ओर जाना कम ही देखने को मिलता है।
हालांकि, ऐसा भी नहीं है कि बाघ इससे पहले पहाड़ों पर नहीं चढ़े हों। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर साकेत बडोला की मानें तो अल्मोड़ा के बिनसर अभयारण्य में बाघ का दिखाई देना कोई नई बात नहीं है। रिकॉर्ड के मुताबिक भूटान में बाघ करीब 4 हजार मीटर की ऊंचाई तक देखा जा चुका है। उत्तराखंड में भी बाघ मसूरी और केदारनाथ क्षेत्र में पहले देखा जा चुका है।
वहीं, अरुणाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में भी बाघों की मौजूदगी सामने आती रही है। बाघ इतनी अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लंबे समय तक नहीं रह पाते। अंततः वे नीचे मैदानी और अपने अनुकूल प्राकृतिक आवास वाले क्षेत्रों की ओर लौट आते हैं।
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