भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अपने दो दिवसीय लखनऊ दौरे के दौरान ऐतिहासिक कॉल्विन तालुकेदार्स कॉलेज के अवध हॉल में छात्र-छात्राओं से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने अपने छात्र जीवन की यादें साझा करते हुए युवाओं को लोकतंत्र में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने ईवीएम की विश्वसनीयता, चुनावी प्रक्रिया, फेक न्यूज और युवा मतदाताओं की भूमिका पर छात्रों के सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में किसी भी सूचना को साझा या स्वीकार करने से पहले उसके स्रोत और सत्यता की जांच जरूरी है।

ज्ञानेश कुमार ने वर्ष 1979 के अपने छात्र जीवन और शिक्षकों से जुड़ी स्मृतियां साझा कीं। उन्होंने कहा कि आज वे जिस मुकाम पर हैं, उसमें उनके विद्यालय और गुरुओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने छात्रों को पढ़ाई के साथ खेलकूद में भी सक्रिय रहने की सलाह दी।

उन्होंने बताया कि अमेरिका जाने की तैयारी के दौरान उनकी माताजी की इच्छा और मातृभूमि के प्रति लगाव ने उन्हें देश में रहकर जनसेवा के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने आईएएस की परीक्षा पास की और केरल कैडर से प्रशासनिक सेवा की शुरुआत की।

ईवीएम को लेकर छात्रों के सवाल पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि भारतीय ईवीएम सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा निर्मित की जाती हैं और इंटरनेट, ब्लूटूथ या वाई-फाई से जुड़ी नहीं होती हैं।

उन्होंने युवाओं से 18 वर्ष की आयु पूरी होते ही मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की अपील की। संविधान के अनुच्छेद 326 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि युवा लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति हैं। युवाओं की सक्रिय भागीदारी से लोकतंत्र और मजबूत होगा।

संवाद के दौरान छात्रों ने चुनावी प्रक्रिया और लोकतंत्र से जुड़े विभिन्न सवाल पूछे, जिनका मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने विस्तार से जवाब दिया। कार्यक्रम में जिलाधिकारी विशाल जी, कॉलेज के प्रधानाचार्य, शिक्षकगण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

रिपोर्ट- अश्वनी अवस्थी

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