भाई-बहन के प्रेम के त्योहार रक्षाबंधन पर यूपी सरकार ने पूरे राज्य में महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा का ऐलान किया था जिसका फायदा 60 लाख से ज्यादा बहनों ने उठाया। अब ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या आगामी चुनाव में बीजेपी को इसका फायदा मिलेगा.

दरअसल उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से तीन दिन फ्री बस सेवा की सराहना करते हुए महिला बस यात्रियों ने इसके लिए सीएम योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद दिया। महिलाओं ने कहा, सरकार का यह कदम शानदार है, उनसे परिचालक की ओर से कोई भी शुल्क नहीं लिया जा रहा है।

60 लाख महिलाओं ने की फ्री यात्रा

बता दें कि उत्तर प्रदेश में अभी तक 60 लाख से ज्यादा महिला यात्रियों ने फ्री बस सेवा का लाभ उठाया है. लखनऊ में पिछले साल करीब 5 लाख से ज्यादा महिलाओं ने फ्री बस सेवा का लुफ्त उठाया था। इस साल उनकी संख्या में और ज्यादा इजाफा हो सकता है।

रक्षाबंधन के मौके पर महिलाओं की सुविधाओं के लिए लखनऊ परिवहन निगम ने 1000 से ज्यादा बसें चलाई हैं। सरकार के इस फैसले को लेकर कई महिला यात्रियों ने अपनी राय रखी और बेहद खुश नजर आईं। अब बीजेपी को उम्मीद है कि यहीं महिलाएं चुनाव में बीजेपी के लिए वोट भी करेंगी.

क्या बीजेपी को होगा इससे चुनावी फायदा ?

महिलाओं के लिए फ्री बस यात्रा को आगामी यूपी विधानसभा चुनाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस फ्री बस यात्रा से महिला वोटर्स बीजेपी के पाले में आएंगी. दरअसल यूपी में 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित मतदाता सूची के मुताबिक राज्य में महिला वोटरों की कुल संख्या 6 करोड़ 9 लाख है. इस पर बीजेपी और समाजवादी पार्टी दोनों की पैनी नजर है. महिलाओं वोटरों को अपने पाले में लाने की कोशिश के तहत ही बीते दिनों अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर 40 हजार रुपये हर साल देने का ऐलान किया था. इसी के बाद योगी सरकार ने रक्षाबंधन के मौके पर तीन दिनों तक महिलाओं के लिए फ्री बस यात्रा का दांव खेल दिया. इतना ही नहीं 60 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं के लिए बस यात्रा पूरी तरह फ्री कर दी गई है.

बस ड्राइवरों को स्पेशल भत्ता

बता दें कि रक्षाबंधन के दौरान बस संचालन में जुटे ड्राइवर और कंडक्टर के लिए यूपी परिवहन निगम ने प्रोत्साहन राशि की भी घोषणा की थी. 26 अगस्त से 31 अगस्त तक छह दिनों में 1800 किलोमीटर बस चलाने वाले ड्राइवर और कंडक्टर को 1200 रुपये अलग से मिलेंगे. इसका मकसद बसों के संचालन को सुचारू रखना और कर्मचारियों को इसके लिए उत्साहित करना था. रक्षाबंधन पर बहुत सी महिलाएं अपने मायके जाती हैं, इसलिए बसों की मांग बढ़ जाती है।

रिपोर्ट: कुणाल कौशल

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