लखनऊ: उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने आगामी चुनावों को लेकर अपनी सियासी रणनीति तेज कर दी है। पार्टी की नजर अब दलित, पिछड़े और महरूम तबकों के बीच अपना जनाधार मजबूत करने पर है। इसके लिए कांग्रेस पूरे प्रदेश में 200 से ज्यादा सामाजिक न्याय सम्मेलन और कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी में है।
इन कार्यक्रमों के जरिए कांग्रेस सामाजिक न्याय, आरक्षण, सियासी नुमाइंदगी और महरूम तबकों के हक़ जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी। पार्टी की कोशिश है कि इन मुद्दों को सिर्फ बड़े मंचों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि गांव, कस्बे, जिले और विधानसभा स्तर तक पहुंचाया जाए।
जमीन पर संगठन मजबूत करने की कवायद
कांग्रेस की यह मुहिम केवल बड़े सम्मेलनों तक सीमित नहीं रहेगी। पार्टी स्थानीय स्तर पर दलित और पिछड़े समाज के नेताओं, सामाजिक संगठनों, नौजवानों और प्रभावशाली लोगों से सीधा संवाद कायम करने की तैयारी में है।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के निर्देश पर इन कार्यक्रमों की जिम्मेदारी विचार विभाग को दी गई है। पार्टी का मकसद सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर लोगों के बीच संवाद बढ़ाने के साथ-साथ संगठन का भी विस्तार करना है।
सम्मेलनों में आरक्षण, हिस्सेदारी, सियासी प्रतिनिधित्व, शिक्षा, रोजगार और वंचित तबकों के अधिकार जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। कांग्रेस इन मुद्दों को स्थानीय समस्याओं से जोड़कर लोगों के बीच अपनी बात रखने की कोशिश करेगी।
2024 में बढ़ा कांग्रेस का वोट शेयर
कांग्रेस की इस नई रणनीति के पीछे 2024 का लोकसभा चुनाव भी अहम माना जा रहा है। समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की 17 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा और इनमें से 6 सीटों पर कामयाबी हासिल की। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस यूपी में सिर्फ एक सीट जीत सकी थी। यानी पांच साल में पार्टी के प्रदर्शन में बड़ा इजाफा हुआ।
वोट शेयर के मोर्चे पर भी कांग्रेस को राहत मिली। 2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी में कांग्रेस का वोट शेयर करीब 9.5 फीसदी रहा, जबकि 2019 में यह करीब 6.4 फीसदी था। यानी पार्टी के वोट शेयर में करीब 3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई। अब कांग्रेस की कोशिश है कि लोकसभा चुनाव में मिले इस बढ़े हुए समर्थन को विधानसभा स्तर पर एक मजबूत और टिकाऊ सियासी आधार में तब्दील किया जाए।
सपा और बसपा के बीच कांग्रेस की नई कवायद
उत्तर प्रदेश की सियासत में दलित और पिछड़ा वोट लंबे वक्त से अहम भूमिका निभाता रहा है। दलित वोटों के बीच बहुजन समाज पार्टी और पिछड़े वर्गों में समाजवादी पार्टी का मजबूत सामाजिक आधार माना जाता है। ऐसे में कांग्रेस के लिए इन तबकों के बीच अपनी अलग पहचान कायम करना आसान नहीं होगा। पार्टी अब ‘सामाजिक इंसाफ’ के मुद्दे को अपनी सियासी मुहिम का अहम हिस्सा बनाकर इस चुनौती का मुकाबला करने की तैयारी में है।
कांग्रेस की नजर खास तौर पर स्थानीय नेतृत्व पर भी है। पार्टी ऐसे नेताओं और नौजवानों को अपने साथ जोड़ना चाहती है, जिनकी अपने सामाजिक तबकों में पकड़ और असर हो। 200 से ज्यादा सामाजिक न्याय सम्मेलन और कार्यक्रम इसी रणनीति का अहम हिस्सा हैं। इन कार्यक्रमों के जरिए पार्टी दलित, पिछड़े और महरूम तबकों के बीच अपना पैगाम पहुंचाने और उनसे सीधा राब्ता कायम करने की कोशिश करेगी।
रिपोर्ट : अभिषेक कुमार पाण्डेय

