नई दिल्ली: दिल्ली में डीटीसी और परिवहन विभाग की बसों पर तैनात निजी चालकों की हड़ताल का असर लगातार सातवें दिन भी देखने को मिला। सोमवार को स्कूल-कॉलेज, सरकारी दफ्तर और निजी कार्यालय खुलने के कारण सड़कों पर रोजाना की तुलना में यात्रियों की संख्या बढ़ गई। ऐसे में बसों की कमी ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी। कई रूटों पर यात्रियों को बस के लिए डेढ़ से दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा। सुबह के समय बस स्टॉप पर सबसे ज्यादा भीड़ दिखाई दी। नौकरीपेशा लोगों के साथ छात्र और अन्य यात्री भी बसों का इंतजार करते नजर आए। कई यात्रियों ने बताया कि उन्हें समय पर बस नहीं मिली, जिसके चलते दफ्तर और कॉलेज पहुंचने में देरी हुई। कुछ लोगों को मजबूरी में ऑटो, ई-रिक्शा और अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ा।
हड़ताल का असर केवल बस सेवा तक सीमित नहीं रहा। यात्रियों का कहना है कि बसों की संख्या कम होने के कारण कई इलाकों में ऑटो और ई-रिक्शा की मांग बढ़ गई। इसका फायदा उठाकर कुछ चालकों ने किराया बढ़ा दिया। जिन यात्रियों के पास बस के अलावा कोई विकल्प नहीं था, उन्हें ज्यादा पैसे देकर सफर करना पड़ा। यात्रियों का कहना है कि रोजाना बस से सफर करने वालों के लिए लगातार कई दिनों से चल रही हड़ताल परेशानी का कारण बन गई है। खासकर दूर-दराज के इलाकों से दिल्ली के दूसरे हिस्सों में आने-जाने वाले लोगों को ज्यादा दिक्कत हो रही है। बसों की कमी का असर ग्रामीण दिल्ली के इलाकों में और ज्यादा दिखाई दिया। यहां कई रूटों पर सार्वजनिक परिवहन के विकल्प पहले से सीमित हैं। ऐसे में बसों की संख्या घटने के बाद लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ा। ग्रामीण इलाकों से शहर की ओर आने वाले यात्रियों को भी अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए दूसरे साधनों पर निर्भर रहना पड़ा।
डीटीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, कुछ निजी चालक अब धीरे-धीरे काम पर लौटने लगे हैं। इसके साथ ही स्थायी और संविदा चालकों को भी बसें उपलब्ध कराकर अलग-अलग रूटों पर भेजा गया है। सोमवार को करीब 50 से 60 प्रतिशत बसों की आउट शेडिंग की गई। अधिकारी के अनुसार, बस सेवा को जल्द से जल्द सामान्य करने की कोशिश की जा रही है। निजी चालकों के काम पर लौटने के साथ बसों की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, जब तक सभी रूटों पर पर्याप्त संख्या में बसें नहीं चलतीं, तब तक यात्रियों की परेशानी पूरी तरह खत्म होती नजर नहीं आ रही है।
निजी चालकों की हड़ताल लगातार सातवें दिन भी जारी रहने से दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। रोजाना बस से सफर करने वाले लोगों के लिए यह स्थिति खास तौर पर मुश्किल बनी हुई है। सोमवार को कामकाजी दिन होने के कारण यात्रियों की संख्या बढ़ने से समस्या और साफ दिखाई दी। डीटीसी की ओर से बसों का संचालन बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। यात्रियों की नजर अब इस बात पर है कि निजी चालकों की हड़ताल कब खत्म होती है और दिल्ली की बस सेवा कब पूरी तरह सामान्य हो पाती है।

