निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश की 10 और उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल की एक रिक्त राज्यसभा सीट पर उपचुनाव भी कराया जाएगा, यानी तीन राज्यों की कुल 12 सीटों पर मतदान 16 अक्टूबर 2026 को होगा। पश्चिम बंगाल वाली सीट सांसद रुक्मिणी मलिक के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। खास बात यह है कि मतदान समाप्त होते ही उसी दिन मतगणना कर नतीजे भी घोषित कर दिए जाएंगे।
यह चुनाव इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हो रहा है, और नतीजे न सिर्फ संसद में दलों की ताकत तय करेंगे बल्कि आगामी चुनाव के लिए एक बड़ा राजनीतिक संकेत भी देंगे। यूपी कोटे की इन 10 सीटों पर मौजूद सांसदों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है, जिनमें भाजपा की 8, सपा और बसपा की 1-1 सीट शामिल है। जिन भाजपा नेताओं का कार्यकाल पूरा हो रहा है उनमें पूर्व पुलिस महानिदेशक बृजलाल, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, गीता शाक्य, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह और बी.एल.वर्मा शामिल हैं। इनके अलावा डॉ.दिनेश शर्मा का कार्यकाल भी इसी दौर में खत्म होना था, लेकिन 5 सितंबर 2026 को उन्हें अंडमान-निकोबार का उपराज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद उनकी जगह किसी नए चेहरे को मौका मिलने की संभावना बढ़ गई है।
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मौजूदा विधानसभा गणित के हिसाब से भाजपा और एनडीए के पास करीब 292 विधायक हैं, जिनके दम पर वे आसानी से 7 सीटें जीत सकते हैं, वहीं समाजवादी पार्टी को दूसरी वरीयता के वोटों के सहारे 2 सीटें मिलने की उम्मीद है। इस पूरे समीकरण में सबसे बड़ा झटका बसपा को लगता दिख रहा है, क्योंकि पार्टी का राज्यसभा से पूरी तरह सफाया होने की आशंका जताई जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह चुनाव सिर्फ राज्यसभा की सीटें भरने भर का मामला नहीं है, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सभी दलों के लिए अपनी ताकत आजमाने और जातीय समीकरण साधने का एक मौका भी है। अब देखना यह होगा कि 16 अक्टूबर को होने वाले मतदान और उसी शाम आने वाले नतीजे उत्तर प्रदेश की सियासत को किस दिशा में मोड़ते हैं।


