मानसून का मौसम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के लिए जितना खूबसूरत होता है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी। लगातार बारिश से जंगल की सड़कें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, पर्यटन गतिविधियाँ सीमित हो जाती हैं और वन्यजीवों की सुरक्षा की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ जाती है। ऐसे समय में कॉर्बेट के वनकर्मी विशेष गश्त कर जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।

बारिश के बीच कीचड़ से भरे रास्तों पर बड़ी हो चुकी घास, उफनते बरसाती नाले और घने जंगल यही वह समय होता है जब कॉर्बेट के वनकर्मियों की असली परीक्षा शुरू होती है। मानसून के दौरान जंगल की कई सड़कें टूट जाती हैं, जिससे वाहन हर जगह नहीं पहुंच पाते। ऐसे में वनकर्मी कई-कई किलोमीटर तक पैदल चलकर संवेदनशील इलाकों की निगरानी करते हैं।

जहाँ पैदल पहुंचना भी मुश्किल हो, वहाँ प्रशिक्षित हाथियों की मदद ली जाती है। वनकर्मी दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचकर शिकार विरोधी गतिविधियों पर नजर रखते हैं। वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं और जंगल में किसी भी असामान्य गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार रहते हैं।

यह गश्त बिल्कुल भी आसान नहीं होती। फिसलन भरे रास्ते, घनी झाड़ियां और हर पल बाघ, हाथी, गुलदार, भालू या जहरीले सांपों से सामना होने का खतरा बना रहता है। इसके बावजूद वनकर्मी जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं।

मानसून के दौरान जब पर्यटन गतिविधियां लगभग थम जाती हैं। तब यही वनकर्मी जंगल की सुरक्षा के लिए तैयार रहते हैं। उनका समर्पण, साहस और कर्तव्यनिष्ठा कॉर्बेट की समृद्ध जैव विविधता को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

रिपोर्ट- गोविन्द पाटनी (रामनगर)/सोनू सिंह

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