निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और योगी सरकार में मंत्री संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता माता प्रसाद पांडे से मुलाकात की है। जिसके बाद दोनों दलों के बीच गठबंधन की चर्चाएं तेज हो गईं हैं। इस मुलाकात ने सूबे के राजनीतिक गलियारों में कई मायने निकाले जा रहे है। कुछ लोग इसे प्रेशर पॉलिटिक्स बता रहे हैं।

हालांकि संजय निषाद ने इस भेंट को लेकर सफाई देते हुए कहा कि वे विशुद्ध रूप से शिष्टाचार निभाने गए थे। उनका कहना है कि माता प्रसाद पांडे की तबीयत कुछ दिनों से ठीक नहीं चल रही थी, इसलिए वे उनका हालचाल जानने पहुंचे थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब दो वरिष्ठ नेता आपस में मिलते हैं तो सामान्य बातचीत होना स्वाभाविक है, इसे किसी राजनीतिक समीकरण से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

लेकिन इसी बीच संजय निषाद के एक बयान ने अटकलों को और हवा दे दी। उन्होंने कहा कि यदि भारतीय जनता पार्टी अपने दरवाजे बंद करती है, तो वे आगे के विकल्पों पर विचार जरूर कर सकते हैं। उनके इस बयान को बीजेपी और एनडीए गठबंधन से नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है। प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं एनडीए में शेयरिंग के लिए सभी दल दांव-पेच लगा रहे हैं।

गौरतलब है कि संजय निषाद पहले भी कई मौकों पर इशारों-इशारों में यह कह चुके हैं कि अगर उन्हें और उनके समाज को उचित सम्मान नहीं मिला, तो उनके लिए दूसरे रास्ते भी खुले हुए हैं। ऐसे में माता प्रसाद पांडे से हुई उनकी हालिया मुलाकात को महज संयोग मानना राजनीतिक विश्लेषकों को मुश्किल लग रहा है।

गौर करने वाली बात यह भी है कि निषाद पार्टी का पूर्वांचल सहित प्रदेश के कई इलाकों में निषाद समुदाय के वोट बैंक पर खासा प्रभाव माना जाता है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह के बयान और मुलाकातें दबाव की राजनीति के तौर पर भी देखी जा रही हैं।

फिलहाल न तो निषाद पार्टी की ओर से और न ही समाजवादी पार्टी की तरफ से किसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा की गई है। लेकिन संजय निषाद के ताजा बयान ने यह जरूर साफ कर दिया है कि अगर भाजपा के साथ रिश्तों में खटास आगे बढ़ी, तो निषाद पार्टी नए राजनीतिक विकल्पों को तलाशने से परहेज नहीं करेगी।

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