लखनऊ: उत्तर प्रदेश में चुनाव नजदीक आते ही राज्य की तमाम सियासी पार्टियां चुनाव की रणनीति बनाने में जुट गई हैं। बीजेपी से लेकर समाजवादी पार्टी तक और कांग्रेस से लेकर मायावती की बहुजन समाज पार्टी तक तमाम दल प्रदेश की राजनीतिक समीकरण को साधने के नए-नए फॉर्मूले तलाश रही है। इस बीच जहां अखिलेश यादव पीडीए फॉर्मूले को धार दे रहे हैं वहीं सत्ताधारी बीजेपी इस बार Gen-Z वोटरों और Alpha जेनरेशन पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है।
Gen-Z और Alpha के लिए बीजेपी का खास प्लान
चुनाव की लगातार बढ़ती तपिश के बीच बीजेपी ने अगली पीढ़ी के वोटर्स यानी कि Gen-Z और Alpha को अपने पाले में लाने की पहल तेज कर दी है। इसके लिए ऐसे युवा सोशल मीडिया एन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स को अपने प्रचार अभियान से जोड़ रही है जो खुद Gen-Z और Alpha हैं ताकि इनसे नए जमाने के युवा और भविष्य के वोटर आसानी से आकर्षित होकर जुड़ सकें।
बीजेपी इन युवा इन्फ्लुएंसर्स के जरिए सरकारी योजनाओं और लाभार्थियों के जरिए इंस्टाग्राम, फेसबुक और व्हाट्स् ऐप के जरिए हर वोटर के मोबाइल तक पहुंचना चाहती है ताकि उन्हें योजनाओं का लाभ बता और समझाकर अपने पाले में कर सके। इन इन्फ्लएंसर्स से ऐसे कंटेंट बनवाए जा रहे हैं जिसमें साल 2014 के बाद देश के बदलाव और 2017 के बाद यूपी में हुए बदलाव को दिखाया और बताया जा रहा है।
Gen-Z के स्टाइल में ही वीडियो कंटेंट
इसके अलावा बीजेपी सोशल मीडिया के जरिए Gen-Z वोटरों के लिए उसी स्टाइल में कंटेंट तैयार करवा रही है जो उन्हें पसंद आते हैं। इसमें मनोरंजन के साथ सरकार की नीतियों को भी सही तरीके से नए जेनरेशन तक पहुंचाने की कवायद की जा रही है। इसको लेकर बीजेपी के एक प्रवक्ता ने कहा कि नए वोटरों और Gen-Z वोटरों को पार्टी से जोड़ने पर हमारा खास फोकस है।
विपक्ष भी Gen-Z को साधने में जुटा
खासबात यह है कि दिल्ली में Gen-Z के प्रदर्शन के बाद ये युवा यूपी चुनाव के केंद्र में आ गए हैं। जहां बीजेपी डिजिटल क्रांति के जरिए घर-घर तक पहुंचकर नए वोटरों को अपने साथ जोड़ना चाहती है वहीं विपक्ष रोजगार, पेपर लीक और बढ़ती बेरोजगारी को मुद्दा बनाकर Gen-Z को अपने पाले में लाने की कोशिश में जुटी हुई है।
बीजेपी की इस नई रणनीति को लेकर समाजवादी पार्टी ने सत्ताधारी पार्टी पर निशाना भी साधा है। समाजवादी पार्टी के एक प्रवक्ता ने कहा कि वर्तमान सरकार की नीतियों और नाकामियों से लोगों में भारी गुस्सा है। बेरोजगारी और लटकी हुई भर्तियों की सच्चाई से युवाओं को केवल डिजिटल प्रचार के जरिए इस बार बीजेपी गुमराह नहीं कर पाएगी।
वहीं कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस भी Gen-Z से जोड़ने के लिए जमीन पर अभियान चल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी फर्जी कंटेंट प्रायोजित कर युवाओं में भ्रामक नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रही है जिसे इस बार लोग स्वीकार नहीं करेंगे।
वहीं बीजेपी की रणनीतिक अभियानों का मुकाबला करने के लिए समाजवादी पार्टी ने जमीनी स्तर पर पारंपरिक वोटरों को साधने के लिए तारीखों के ऐलान से पहले ही बूथ संपर्क अभियान शुरू कर दिया है।
समाजवादी पार्टी का डोर टू डोर आउटरीच
समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को बीजेपी सरकार की असफलताओं को बता और गिना रहे हैं जबकि सपा सरकार की उपलब्धियों से उन्हें प्रभावित करने की मुहिम में जुटे हुए हैं। अखिलेश यादव के निर्देश के बाद समाजवादी पार्टी ने बूथ स्तर पर चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत कर दी है और डोर टू डोर कैंपेन को समाजवादी पार्टी ज्यादा तरजीह दे रही है।
ऐसे में इस बार साफ है कि 2027 का यूपी चुनाव किसी युद्ध से कम नहीं है और जीतने के लिए राजनीतिक दलों के तरकश में हर समुदाय और हर जेनरेशन को साधने के लिए कई तीर हैं। बीजेपी आधुनिक डिजिटल फ्लेटफॉर्म्स के जरिए Gen-Z के लिए नैरेटिव गढ़ने की कोशिश में है तो सपा इन्हीं Gen-Z की समस्या को सामने रखकर उन्हें पाले में लाने की कोशिश में जुटी है. ऐसे में अब चंद महीनों बाद ही साफ हो जाएगा कि आखिरकार Gen-Z इस बार किसके साथ है।
रिपोर्ट: कुणाल कौशल

