लखनऊ : उत्तर प्रदेश में इस बार मानसून की चाल उतार-चढ़ाव भरी रही है। एक जून से 23 अगस्त 2026 तक प्रदेश में औसत बारिश सामान्य से करीब 15 फीसदी कम दर्ज की गई है। इस अवधि में जहां सामान्य तौर पर करीब 540.7 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, वहीं प्रदेश में अब तक लगभग 460.1 मिलीमीटर बारिश हुई है। यानी सामान्य के मुकाबले करीब 80.6 मिलीमीटर पानी कम बरसा है। उपलब्ध आंकड़ों के हिसाब से बारिश में कमी करीब 14.9 फीसदी बैठती है।
हालांकि मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां अभी बनी हुई हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होने पर मौजूदा कमी काफी हद तक पूरी होने की उम्मीद है। 23 अगस्त को भी IMD ने उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई थी।
पूर्वी यूपी में सबसे ज्यादा कमी
बारिश के आंकड़ों में सबसे ज्यादा चिंता पूर्वी उत्तर प्रदेश को लेकर है। यहां सामान्य के मुकाबले करीब 22 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। इसके उलट पश्चिमी यूपी में मानसून अपेक्षाकृत बेहतर रहा और यहां बारिश सामान्य से करीब 3 फीसदी ही कम है। यानी प्रदेश के दोनों हिस्सों के बीच बारिश का अंतर करीब 19 प्रतिशत अंक का है। पूर्वी यूपी में बारिश की कमी का असर खरीफ फसलों, जलाशयों में पानी की आवक और भूजल रिचार्ज पर पड़ सकता है।
अगस्त के आखिरी दिनों पर टिकी उम्मीद
अब मानसून के शेष दिनों में होने वाली बारिश महत्वपूर्ण हो गई है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून अभी सक्रिय है, इसलिए अगस्त के आखिरी दिनों और सितंबर की शुरुआती अवधि में अच्छी बारिश होने पर प्रदेश का मौजूदा बारिश घाटा कम हो सकता है। यूपी के लिए चुनौती सिर्फ बारिश का आंकड़ा पूरा करना नहीं, बल्कि जलाशयों में पर्याप्त पानी पहुंचना भी है। लगातार बारिश होने पर नदियों के प्रवाह के साथ बांधों और जलाशयों में पानी की उपलब्धता बढ़ती है, जिसका फायदा सिंचाई और आने वाले रबी सीजन को मिल सकता है।
क्या पूरा होगा बारिश का लक्ष्य?
मौजूदा स्थिति को देखें तो प्रदेश में मानसून सामान्य से नीचे जरूर है, लेकिन मानसून अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। 460.1 मिलीमीटर बारिश के मुकाबले सामान्य 540.7 मिलीमीटर होने का मतलब है कि सामान्य स्तर तक पहुंचने के लिए करीब 80.6 मिलीमीटर अतिरिक्त बारिश की जरूरत है। यही वजह है कि आने वाले दिनों की बारिश बेहद अहम है।
यदि मानसून सक्रिय बना रहा और प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में अच्छी बारिश हुई तो राज्य का मौजूदा बारिश घाटा तेजी से कम हो सकता है। फिलहाल तस्वीर यह है कि पश्चिमी यूपी सामान्य के काफी करीब पहुंच चुका है, जबकि पूर्वी यूपी प्रदेश के औसत को नीचे खींच रहा है। अब अगस्त के आखिरी दौर और सितंबर की बारिश यह तय करेगी कि यूपी इस मानसून सीजन का समग्र आंकड़ा सामान्य के कितना करीब पहुंच पाता है।
रिपोर्ट : अभिषेक कुमार पाण्डेय


