प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल और डीजल बचाने की अपील के बाद बिहार में भी इस दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वाहनों के कम से कम इस्तेमाल को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी दी है। उन्होंने मंत्रियों, पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और राज्य की जनता से ईंधन बचत में सहयोग करने की अपील की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य अनावश्यक वाहन उपयोग को कम करना और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना है।
मुख्यमंत्री कारकेड में वाहनों की संख्या होगी कम
सम्राट चौधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री कारकेड में वाहनों की संख्या कम या न्यूनतम करने का निर्णय लिया गया है। यह फैसला पेट्रोल और डीजल की बचत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। मुख्यमंत्री के काफिले में गाड़ियों की संख्या घटाने से सरकार की ओर से सादगी और संसाधनों के जिम्मेदार इस्तेमाल का संदेश भी जाएगा। इस फैसले को प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बाद बिहार सरकार की ओर से उठाया गया अहम कदम माना जा रहा है।
मंत्रियों और अधिकारियों से भी अपील
बिहार सरकार ने सिर्फ मुख्यमंत्री कारकेड तक ही बात सीमित नहीं रखी है। मंत्रियों, निगम बोर्ड के अध्यक्षों और सदस्यों, सभी पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से भी अपील की गई है कि वे सार्वजनिक कार्यक्रमों में अतिरिक्त वाहन लेकर न जाएं। सरकार का कहना है कि जब जरूरी न हो, तब अनावश्यक गाड़ियों का इस्तेमाल कम किया जाना चाहिए। इससे ईंधन की बचत होगी और सरकारी स्तर पर भी एक सकारात्मक उदाहरण स्थापित होगा।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस्तेमाल पर जोर
सम्राट चौधरी ने राज्य की जनता से भी अपील की है कि वे मेट्रो, बस, ऑटो या अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक इस्तेमाल करें। निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक परिवहन अपनाने से पेट्रोल-डीजल की खपत कम होगी। इसके साथ ही सड़कों पर वाहनों का दबाव भी घट सकता है। सरकार की यह अपील आम लोगों को ईंधन बचत अभियान से जोड़ने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
सरकारी बैठकों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को बढ़ावा
राज्य सरकार के सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि कॉन्फ्रेंस और सरकारी बैठकों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इससे अधिकारियों और कर्मचारियों की यात्रा कम होगी। यात्रा कम होने से वाहनों का उपयोग भी घटेगा और ईंधन की बचत होगी। यह फैसला प्रशासनिक कामकाज को डिजिटल माध्यम से आगे बढ़ाने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।
कैंटीन में पाम ऑयल का कम इस्तेमाल
बिहार सरकार ने सरकारी दफ्तरों में चलने वाली कैंटीनों को लेकर भी निर्देश दिया है। प्रदेश के सरकारी कार्यालयों की कैंटीन में पाम ऑयल का कम से कम इस्तेमाल करने को कहा गया है। यह फैसला भी सरकार की व्यापक बचत और जिम्मेदार उपभोग की नीति का हिस्सा बताया गया है। इससे सरकारी दफ्तरों में खाने-पीने की व्यवस्था में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
वर्क फ्रॉम होम और नो व्हीकल डे की सलाह
सरकारी और निजी दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम की संस्कृति को बढ़ावा देने की सलाह दी गई है। सरकार का मानना है कि जहां संभव हो, वहां घर से काम करने की व्यवस्था अपनाई जा सकती है। इससे कर्मचारियों की रोजाना यात्रा कम होगी और वाहनों का उपयोग घटेगा। इसके अलावा, सप्ताह में एक दिन सभी लोगों से ‘नो व्हीकल डे’ आयोजित करने का आग्रह किया गया है। इस दिन लोग निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन या वैकल्पिक साधनों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

