Uttarpradeshnews : जांच में सामने आया है कि कई मरीजों के यूएचआईडी नंबर और असाध्य योजना कार्ड का गलत इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि मरीजों के नाम पर हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (एचआरएफ) स्टोर से महंगी दवाएं जारी कराई गईं और उनका भुगतान भी कर लिया गया। इसके बाद इन दवाओं के अवैध रूप से बाहर बेचने यानी कालाबाजारी किए जाने की आशंका भी जताई जा रही है। मामले के सामने आने के बाद पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग में असाध्य योजना के बजट से जुड़े कथित दवा घोटाले की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पांच सदस्यीय जांच समिति की लगभग 700 पेज की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि सामान्य पेशाब संबंधी समस्याओं और गुर्दे की पथरी के मरीजों के नाम पर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की महंगी दवाएं खरीदी गईं। जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे मामले में करीब ढाई करोड़ रुपये के वित्तीय अनियमितता की आशंका जताई जा रही है, जिससे स्वास्थ्य विभाग में गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मरीजों के यूएचआईडी और कार्ड का हुआ दुरुपयोग
जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कई मरीजों के यूएचआईडी नंबर और असाध्य योजना कार्ड का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि मरीजों के नाम पर हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (एचआरएफ) स्टोर से महंगी दवाएं निकलवाई गईं और उनका भुगतान भी कर दिया गया। इसके बाद इन दवाओं के अवैध रूप से बाहर बेचने यानी कालाबाजारी किए जाने की आशंका भी जताई गई है। इस मामले ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
निजी मेडिकल स्टोर तक पहुंचीं दवाएं
जांच समिति को ऐसे कई मामले मिले हैं, जिनमें किडनी, प्रोस्टेट और पथरी जैसी बीमारियों के मरीजों के नाम पर कैंसर की महंगी दवाएं मंगाई गईं। दस्तावेजों में इन दवाओं को मरीजों को दिए जाने का उल्लेख किया गया है, जबकि वास्तविक रूप में इन्हें निजी मेडिकल स्टोर्स में बेचे जाने के संकेत मिले हैं। फिलहाल जांच टीम दवाओं की खरीद से लेकर बिक्री तक पूरी प्रक्रिया की कड़ी को खंगाल रही है, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके।
मृत मरीज के नाम पर भी आती रहीं दवाएं
रिपोर्ट में हरदोई की एक महिला मरीज का भी मामला सामने आया है, जिसकी दोनों किडनियां फेल हो चुकी थीं और वह डायलिसिस पर थी। आरोप है कि मरीज की मृत्यु के बाद भी उसके नाम पर कई महीनों तक कैंसर की महंगी दवाएं मंगाई जाती रहीं। जांच समिति अब यह पता लगाने में जुटी है कि करोड़ों रुपये की ये दवाएं आखिर कहां और कैसे इस्तेमाल या बेची गईं, साथ ही इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन लोग शामिल हैं। मामले की गहन जांच पुलिस की सहायता से आगे बढ़ाई जा रही है।
केजीएमयू में सभी कैंसर विभागों का होगा ऑडिट, प्रशासन सख्त
केजीएमयू में सामने आए करीब ढाई करोड़ रुपये के दवा घोटाले के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। संस्थान ने उन सभी सात विभागों का विस्तृत ऑडिट कराने का निर्णय लिया है, जहां कैंसर मरीजों का इलाज और कीमोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध है। निर्णय के तहत 5000 रुपये से अधिक कीमत वाली सभी दवाओं के बिल, वाउचर और वितरण रिकॉर्ड की गहन जांच की जाएगी। साथ ही पिछले पांच महीनों में सरकारी योजनाओं के तहत इलाज करा चुके मरीजों का पूरा विवरण भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है। इन विभागों में यूरोलॉजी, रेडियोथेरेपी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, स्त्री एवं प्रसूति रोग, गायनी ऑन्कोलॉजी और एंडोक्राइन सर्जरी शामिल हैं। प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के अनुसार, पांच सदस्यीय जांच समिति पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है और महंगी कीमोथेरेपी तथा इम्यूनोथेरेपी से जुड़े रिकॉर्ड भी अलग से खंगाले जाएंगे। वहीं, मामले में कार्रवाई करते हुए यूरोलॉजी विभाग के तीन कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया है और संबंधित एजेंसी से वसूली की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।


