शिव-पार्वती विवाहस्थली तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर पैदल चले दूल्हा-दुल्हन और बाराती
जनपद रुद्रप्रयाग में रविवार रात से जारी मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। लगातार बारिश के चलते विश्व प्रसिद्ध त्रियुगीनारायण मंदिर को जोड़ने वाला सड़क मार्ग कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे विवाह समारोह के लिए पहुंचे दूल्हा-दुल्हन, बारातियों और श्रद्धालुओं को वाहनों से उतरकर पैदल ही मंदिर तक पहुंचना पड़ा।
बारिश से सड़क ध्वस्त होने के कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। मजबूरी में दूल्हा-दुल्हन, उनके परिजन और बाराती आवश्यक सामान के साथ पैदल मार्ग से आगे बढ़े और कठिन परिस्थितियों के बावजूद निर्धारित मुहूर्त पर त्रियुगीनारायण मंदिर पहुंचकर विवाह की सभी धार्मिक रस्में संपन्न कीं। इस दौरान कई बारातियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
त्रियुगीनारायण मंदिर वह पावन स्थल है, जहां पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ था। इसी कारण देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और नवविवाहित जोड़े यहां विवाह के लिए पहुंचते हैं। लेकिन इस बार मौसम की मार ने इस ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण बना दिया।
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व्यापार संघ अध्यक्ष महेंद्र सेमवाल ने बताया कि रविवार रात हुई भारी बारिश के कारण त्रियुगीनारायण मोटरमार्ग कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई। उन्होंने बताया कि विवाह समारोहों के लिए आए दूल्हा-दुल्हन और बारातियों को पैदल चलकर मंदिर तक पहुंचना पड़ा। उन्होंने प्रशासन से मार्ग को शीघ्र सुचारु कराने की मांग की है ताकि स्थानीय लोगों, व्यापारियों और श्रद्धालुओं को राहत मिल सके।
इधर, लगातार बारिश का असर विजयनगर–तैला मोटरमार्ग पर भी देखने को मिला। गंगानगर के समीप सड़क का एक हिस्सा ध्वस्त होने से यह मार्ग पूरी तरह बंद हो गया है। मार्ग बंद होने से क्षेत्र के ग्रामीणों और यात्रियों की आवाजाही प्रभावित हो गई है तथा लोगों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है।
लोक निर्माण विभाग और प्रशासन की टीमें क्षतिग्रस्त मार्गों को खोलने के प्रयास में जुटी हैं। वहीं प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें, प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन करें तथा भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतें।

