सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद से जुड़े विवाद के बीच कैराना से सांसद इकरा हसन को उनके आवास पर हाउस अरेस्ट किए जाने का मामला सामने आया है। सांसद का आरोप है कि वह सहारनपुर जाकर अधिकारियों से मुलाकात करना चाहती थीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी। देर रात उनके आवास पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई।
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को हटाए जाने की कार्रवाई के बाद मामला लगातार चर्चा में है। इसी प्रकरण को लेकर कैराना सांसद इकरा हसन ने सहारनपुर जाने की बात कही थी। उनका कहना है कि वह वहां अधिकारियों से मिलकर मामले की जानकारी लेना चाहती थीं और क्षेत्र की जनता की चिंताओं को प्रशासन के सामने रखना चाहती थीं। हालांकि, उनके मुताबिक सहारनपुर रवाना होने से पहले ही पुलिस ने उन्हें उनके कैराना स्थित आवास पर रोक दिया।
रात में आवास पर पहुंचा पुलिस बल
इकरा हसन के मुताबिक, रात के समय उनके आवास के बाहर अचानक बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए। वह सहारनपुर जाने की तैयारी कर रही थीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें बाहर निकलने से रोक दिया। इसके बाद उन्हें हाउस अरेस्ट किए जाने की जानकारी सामने आई। सांसद ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह किसी राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल होने नहीं, बल्कि एक स्थानीय और संवेदनशील मामले को लेकर अधिकारियों से मिलने जा रही थीं। उनका कहना है कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के तौर पर जनता से जुड़े मुद्दों को प्रशासन तक पहुंचाना उनकी जिम्मेदारी है।
‘जनता की आवाज उठाना क्या अपराध है?’
हाउस अरेस्ट किए जाने के बाद इकरा हसन ने सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अगर कोई सांसद अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को लेकर अधिकारियों से मुलाकात करना चाहता है तो उसे रोकना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सही नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि क्या अब किसी निर्वाचित सांसद का जनता से जुड़े मामले में प्रशासन से मिलने जाना भी अपराध माना जाएगा?
सांसद के मुताबिक, जनप्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद सिर्फ सदन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उन्हें अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं और चिंताओं को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी होती है। इकरा हसन ने कहा कि उन्हें रोककर जनता की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वह इस तरह की कार्रवाई से पीछे हटने वाली नहीं हैं।
सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद प्रकरण क्या है?
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद बना हुआ है। मामले में अदालत के आदेश के बाद प्रशासन की ओर से मस्जिद के ढांचे को हटाने की कार्रवाई शुरू किए जाने की बात सामने आई है। कार्रवाई के लिए जेसीबी और अन्य मशीनरी को मौके पर पहुंचाया गया था। पुलिस की मौजूदगी में परिसर में कार्रवाई की गई। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चा और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी क्रम में कैराना सांसद इकरा हसन ने सहारनपुर जाकर अधिकारियों से मुलाकात करने और पूरे मामले की जानकारी लेने की इच्छा जताई थी।
सांसद ने प्रशासन से मांगा जवाब
इकरा हसन ने कहा कि अगर प्रशासन के पास इस कार्रवाई को लेकर कानूनी और प्रशासनिक आधार है तो उसे स्पष्ट रूप से सामने रखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि जनता के मन में उठ रहे सवालों का जवाब बातचीत और पारदर्शिता के जरिए दिया जाना चाहिए, न कि जनप्रतिनिधियों को उनके क्षेत्र से बाहर जाने से रोककर। उन्होंने प्रशासन से यह भी सवाल किया कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोकने की जरूरत क्यों पड़ी। सांसद के मुताबिक, वह अधिकारियों से मिलकर स्थिति को समझना चाहती थीं और संबंधित लोगों की बात प्रशासन के सामने रखना चाहती थीं।
‘लोकतंत्र में असहमति की जगह होनी चाहिए’
सांसद ने अपनी प्रतिक्रिया में लोकतांत्रिक अधिकारों का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि लोकतंत्र में सरकार और प्रशासन के फैसलों पर सवाल पूछना जनप्रतिनिधियों का अधिकार है। किसी मुद्दे पर अलग राय रखने या जनता की शिकायत प्रशासन तक पहुंचाने को दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इकरा हसन ने कहा कि जनता ने उन्हें अपनी बात रखने के लिए चुना है और वह अपने क्षेत्र के लोगों से जुड़े मामलों को उठाती रहेंगी। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई से उनकी आवाज नहीं रुकेगी।
मामले पर आगे भी बढ़ सकती है सियासत
सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद प्रकरण पहले से ही संवेदनशील बना हुआ है। अब कैराना सांसद को हाउस अरेस्ट किए जाने की बात सामने आने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। सांसद की ओर से कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं, जबकि प्रशासन की ओर से हाउस अरेस्ट किए जाने की कार्रवाई को लेकर विस्तृत आधिकारिक पक्ष का इंतजार है।
घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सांसद को सहारनपुर जाने से रोकने का प्रशासनिक आधार क्या था और इस कार्रवाई को लेकर पुलिस या प्रशासन की ओर से क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है। आने वाले समय में इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल देखने को मिल सकती है।


