MathuraNews : वृंदावन में आंधी और बारिश शुरू होते ही बांके बिहारी मंदिर क्षेत्र में एक हादसा हो गया, जिसमें कई श्रद्धालु घायल हो गए। बताया जा रहा है कि मोबाइल पर मौसम संबंधी अलर्ट आने के कुछ ही मिनटों बाद यह घटना हुई, जिससे मंदिर क्षेत्र की तंग गलियों और पुराने भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। वृंदावन में मंगलवार शाम एक दर्दनाक हादसा हो गया, जब बांके बिहारी मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग पर एक पुराने मकान का जर्जर छज्जा अचानक गिर पड़ा। इस घटना में नौ श्रद्धालु घायल हो गए, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शाम करीब छह बजे मोबाइल पर आंधी-बारिश का अलर्ट आने के बाद लोग मौसम को लेकर चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान तेज आंधी शुरू हो गई और कुछ लोग बाहर निकलकर स्थिति देखने लगे। तभी अचानक जोरदार आवाज के साथ छज्जा गिर पड़ा, जिससे अफरा-तफरी मच गई। परिजनों ने बाहर आकर देखा तो एक व्यक्ति सड़क पर बेहोश पड़ा था और उसके सिर से खून बह रहा था। तुरंत उसे अस्पताल ले जाया गया। परिजन उन्हें देखते ही रोने चिल्लाने लगे। मनीष गोस्वामी और उनके परिजन उन्हें हाथों में उठाकर लेकर दौड़ने लगे। तब तक एंबुलेंस आ चुकी थी, जिसकी सहायता से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। अलीगढ़ के कावेरी विहार के रहने वाले लक्ष्मीनारायण अपना जन्मदिन मनाने के लिए बांकेबिहारी मंदिर में अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ आए थे। मनीष गोस्वामी ने बताया कि वह दर्शन कर उनके घर पर बैठे थे लेकिन हाेनी उन्हें बाहर तक खींच ले गई। किसी को ऐसी उम्मीद भी नहीं थी कि ऐसा हादसा हो सकता है।

उनके साथ आए लोगाें ने दोनों को संभाला। हादसे के बाद बेटा पिता से चिपक गया। अस्पताल पहुंचने पर वह पिता के साथ व्हीलचेयर पर बैठा रहा। पिता ने अधिकारियों और चिकित्सकों से कहा कि मेरे बेेटे को कुछ नहीं होना चाहिए। आप पहले उसका इलाज कीजिए। प्राथमिक उपचार के परिजन दोनों को आगरा ले गए ।
राजस्थान के सवाई माधोपुर से चंचल प्रजापति और उसकी मां जानकी देवी आठ लोगों के साथ दर्शन करने को आईं थी। वृंदावन की परिक्रमा लगाने के बाद वह ठाकुरजी के दर्शन के लिए पहुंचे थे। हादसे में मां-बेटी घायल हो गए हैं। परिजन ने बताया कि दोनों की हालत खतरे से बाहर है।
वृंदावन की संकरी गलियां, वर्षों पुराने भवन और प्रतिदिन उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ प्रशासन के लिए लगातार चुनौती बनी हुई है। विशेषकर त्योहार, सप्ताहांत और अवकाश के दिनों में मंदिर क्षेत्र में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
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