WestAsiaCrisis :पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इस्राइल के बीच घोषित संघर्षविराम अब संकट में आ गया है। अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने भी पलटवार करते हुए कार्रवाई की है। तेहरान की ओर से पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की सैन्य ताकत पर कड़ा हमला करते हु ए कहा है कि उसकी सेना पूरी तरह कमजोर और बिखरी हुई स्थिति में है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की नौसेना और वायुसेना लगभग समाप्त हो चुकी हैं। ट्रंप के अनुसार, ईरान की सैन्य व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्थित हो गई है और उसके बड़े हिस्से को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसके चलते वह लगभग पराजित स्थिति में पहुंच चुकी है। ट्रंप ने कहा, “ईरान सिर्फ बातें करता है, कार्रवाई नहीं करता। पश्चिम एशिया का दबंग अब खत्म हो चुका है।” ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित समझौते का जिक्र करते हुए कहा, “उन्होंने ऐसे समझौते पर बातचीत करने में बहुत देर कर दी, जो उनके लिए बहुत अच्छा साबित हो सकता था। अब उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।”

अमेरिका-ईरान के बीच तनाव क्यों बढ़ा?

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तब और बढ़ गया जब ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दक्षिणी ईरान में हुए अमेरिकी हमलों के जवाब में कार्रवाई की। इसके बाद ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाते हुए ड्रोन और मिसाइल हमले किए। इस घटनाक्रम से पूरे क्षेत्र में सैन्य टकराव की आशंका और गहरी हो गई है। इससे पहले अमेरिकी सेना ने दावा किया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर एक अमेरिकी हेलिकॉप्टर को गिराए जाने की खबरों के बाद उन्होंने ईरानी ठिकानों पर आत्मरक्षा में हमले किए थे। इस घटना ने दोनों देशों के बीच पहले से चल रहे तनाव को और बढ़ा दिया। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी है कि ईरान किसी भी हमले या धमकी का जवाब जरूर देगा। उनकी इस टिप्पणी के बाद क्षेत्र में हालात और बिगड़ने तथा सैन्य टकराव बढ़ने की आशंका और गहरी हो गई है।

इस्राइल पर भड़के तुर्किये के राष्ट्रपति एर्दोगन

तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने इस्राइल की सैन्य कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि सीरिया और लेबनान पर किए जा रहे इस्राइली हमले अब तुर्किये की सुरक्षा के लिए भी खतरा बनते जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया कि इस्राइल की आक्रामक नीतियां पूरी दुनिया के लिए जोखिम पैदा कर रही हैं और इन्हें तुरंत रोका जाना चाहिए। एर्दोगन ने कहा, “अगर इस्राइली हिंसा को नहीं रोका गया तो इसके गंभीर परिणाम पूरे क्षेत्र और मानवता को भुगतने होंगे।” उन्होंने जोर देकर कहा कि इस्राइल को रोकना मानवता का कर्तव्य है और इतिहास को दोहराने से बचना जरूरी है।

 

 

 

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