Noida: नोएडा सेक्टर 126 के एक लेबर कैंप में अफरा-तफरी मच गई जब अचानक आग लगने से पूरे इलाके में धुआं फैल गया। देखते ही देखते आग ने कैंप के कई हिस्सों को अपनी चपेट में ले लिया। आग की ऊंची-ऊंची लपटें और आसमान में उठता काला धुआं देखकर आसपास के लोगों में भी दहशत फैल गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि दमकल विभाग और स्थानीय प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के चलते सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और किसी के घायल होने या जान गंवाने की सूचना नहीं है।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग लगने के कुछ ही मिनटों बाद कैंप में रहने वाले मजदूर अपने परिवारों के साथ बाहर निकलने लगे। कई लोगों ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा कि कहीं पास में कूड़ा जल रहा है, लेकिन जब धुआं तेजी से बढ़ा और आग की लपटें दिखाई देने लगीं तो पूरे कैंप में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।
सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं। फायर कर्मियों ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए आग बुझाने का अभियान शुरू किया। आग तेजी से फैल रही थी क्योंकि कैंप में टीन शेड, लकड़ी और अन्य ज्वलनशील सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। इसके बावजूद दमकल विभाग ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया और उसे आसपास के क्षेत्रों तक फैलने से रोक दिया।

अधिकारियों के अनुसार, यदि आग कुछ देर और अनियंत्रित रहती तो स्थिति काफी गंभीर हो सकती थी। आसपास अन्य अस्थायी आवास और निर्माण स्थल भी मौजूद थे, जहां आग फैलने का खतरा बना हुआ था। लेकिन समय रहते की गई कार्रवाई ने बड़े हादसे को टाल दिया।
हालांकि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन कई मजदूरों का घरेलू सामान, कपड़े, जरूरी दस्तावेज और दैनिक उपयोग की वस्तुएं आग में जलकर राख हो गईं। आग बुझने के बाद कई परिवार अपने सामान के अवशेष तलाशते नजर आए। कुछ लोगों ने बताया कि उनके पास जो थोड़ा-बहुत सामान था, वह भी इस आग में खत्म हो गया।
प्रारंभिक जांच में आग लगने के पीछे शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है। हालांकि फायर विभाग और पुलिस की टीम पूरे मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आग लगने के वास्तविक कारणों की पुष्टि की जा सकेगी।

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घटना के बाद प्रशासन ने निर्माण स्थलों और लेबर कैंपों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बिजली के तारों और अस्थायी कनेक्शनों की नियमित जांच कराने पर भी जोर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी के मौसम में बिजली पर बढ़ते दबाव और असुरक्षित वायरिंग के कारण ऐसी घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लेबर कैंपों में रहने वाले मजदूर अक्सर सीमित संसाधनों में जीवन गुजारते हैं और वहां अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होते। ऐसे में छोटी सी चूक भी बड़े हादसे का रूप ले सकती है। इस घटना ने एक बार फिर श्रमिक बस्तियों में सुरक्षा मानकों को मजबूत करने की आवश्यकता को उजागर किया है।
फिलहाल आग पूरी तरह बुझा दी गई है और स्थिति सामान्य है। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया है। समय रहते बचाव कार्य होने से एक बड़ा हादसा टल गया, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

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