बारिश का असर अब दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर भी देखने को मिला है। हालात यह है कि हाइवे अब बारिश की मार नही झेल पा रहे है। जमीन से कई मीटर की ऊंचाई पर बने देश के ये सबसे आधुनिक हाईवे मामूली बारिश में जनमग्न हो रहे है।
गाजियाबाद से गुजरने वाले एक्सप्रेसवे पर जलभराव की स्थिति ने देश के सबसे महंगे रोड इंफ्रास्ट्रक्चर के इंजीनियरिंग दावों की पोल खोल कर रख दी है। करोड़ों रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे पर जब पानी भरता है, तो रफ्तार के दीवाने इस एक्सप्रेसवे पर गाड़ियां रेंगने को मजबूर हो जाती हैं।
ऊंचाई पर होने के बावजूद इन हाईवे के डूबने के पीछे सबसे बड़ी वजह तकनीकी खामियां और ड्रेनेज सिस्टम का फेल होना है। हाईवे की सतह पर पानी के निकास के लिए बने डाउन-टेक पाइप जाम हो चुके हैं, जिससे सड़कों पर जमा पानी नीचे नहीं गिर पाता। इसके साथ ही, विजय नगर, इंदिरापुरम और खोड़ा कॉलोनी के पास ग्राउंड लेवल का स्थानीय ड्रेनेज पहले से ही ओवरफ्लो रहता है।
एक्सप्रेसवे पर पानी की निकासी नहीं होने के कारण हल्की सी बारिश में जलभराव की स्थिति देखने को मिलती है। मुख्य कैरिजवे पर कई फीट तक पानी जमा हो जाता है और 100 की रफ्तार वाले एक्सप्रेसवे पर मिनी-झीलें बन जाती हैं। इस जलभराव के चलते सफर करने वाले यात्रियों के लिए जान का जोखिम बेहद बढ़ गया है।
तेज रफ्तार में अचानक पानी के पैच आने से गाड़ियां ‘हाइड्रोप्लेनिंग’ यानी स्लिप होने का शिकार हो रही हैं, जिससे ब्रेक पूरी तरह फेल हो जाते हैं और गाड़ियां आपस में टकरा रही हैं। गाजियाबाद के विजय नगर बाईपास और काला पत्थर कट के पास हालात सबसे ज्यादा खतरनाक हैं। प्रशासन और नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की इस घोर लापरवाही के कारण अब आम जनता को अपनी जान हथेली पर रखकर इस वीआईपी रोड से गुजरना पड़ रहा है।

