नई दिल्ली: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा को लेकर राजधानी दिल्ली में सुरक्षा के इंतजाम बेहद कड़े किए गए हैं। 24 घंटे से भी कम समय की इस यात्रा के दौरान उनकी सुरक्षा के लिए ऐसा सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है, जिसमें जमीन से लेकर आसमान तक हर स्तर पर निगरानी रखी जा रही है। होटल के आसपास कुछ समय के लिए नो-फ्लाई जोन से लेकर खाने की जांच और संभावित केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर खतरों की पहचान तक के इंतजाम किए गए हैं।
शी जिनपिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत पहुंचे हैं। उनकी यात्रा ऐसे समय हो रही है जब सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित विरोध, प्रदर्शन या संदिग्ध गतिविधि को लेकर पूरी तरह अलर्ट हैं। खासतौर पर तिब्बती एक्टिविस्टों की ओर से प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को कई स्तरों पर मजबूत किया गया है।
शी जिनपिंग के ठहरने वाले होटल और उनके आने-जाने वाले रास्तों पर सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी नजर है। होटल के आसपास के इलाके में संदिग्ध गतिविधियों की लगातार निगरानी की जा रही है। उनकी आवाजाही के दौरान सड़क पर आम ट्रैफिक को नियंत्रित करने के साथ-साथ जरूरत के मुताबिक रास्तों को कुछ समय के लिए बंद या डायवर्ट भी किया जा सकता है। सुरक्षा व्यवस्था सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं है। होटल और आसपास के संवेदनशील इलाकों के ऊपर ड्रोन या किसी दूसरी छोटी उड़ने वाली वस्तु को पहुंचने से रोकने के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं।
शी जिनपिंग की सुरक्षा में सबसे अहम इंतजामों में से एक होटल के आसपास हवाई गतिविधियों पर नियंत्रण है। उनकी मौजूदगी के दौरान होटल के ऊपर कुछ समय के लिए नो-फ्लाई जोन लागू किया जा सकता है। इसका मकसद किसी भी अनधिकृत ड्रोन, यूएवी या दूसरी कम ऊंचाई पर उड़ने वाली वस्तु को सुरक्षा घेरे में प्रवेश करने से रोकना है। चीन की तरफ से भी भारत को सुरक्षा को लेकर खास इनपुट दिए गए हैं। बताया गया है कि ड्रोन, गुब्बारे, बैनर या लाउडस्पीकर जैसे साधनों के जरिए किसी तरह के एंटी-चाइना प्रदर्शन या प्रचार की कोशिश हो सकती है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों को इन गतिविधियों पर खास नजर रखने को कहा गया है।
किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष की सुरक्षा में खाने-पीने की चीजों की जांच भी बेहद अहम होती है। शी जिनपिंग के मामले में भी खाने की सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरती जा रही है। उनके लिए परोसे जाने वाले भोजन और पानी की जांच को लेकर अलग व्यवस्था रखी गई है। चीन से उनके साथ आने वाली टीम में ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो खाने और दूसरी जरूरी चीजों की सुरक्षा से जुड़े प्रोटोकॉल को देखते हैं। किसी भी भोजन को शी जिनपिंग तक पहुंचाने से पहले उसकी जांच की जाती है, ताकि किसी तरह की मिलावट या संदिग्ध पदार्थ की आशंका को दूर किया जा सके।
शी जिनपिंग की सुरक्षा में भारतीय एजेंसियों के साथ चीन की अपनी सुरक्षा टीम भी सक्रिय है। विदेशी दौरों पर चीनी राष्ट्रपति के साथ उनकी सुरक्षा और प्रोटोकॉल से जुड़े अधिकारी भी आते हैं। ये अधिकारी भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ तालमेल बनाकर राष्ट्रपति की यात्रा से जुड़े सुरक्षा इंतजामों को देखते हैं। उनकी आधिकारिक गाड़ियों और काफिले से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर भी खास सावधानी बरती जाती है। राष्ट्रपति की आवाजाही के लिए इस्तेमाल होने वाली लिमोजिन और दूसरी गाड़ियों की सुरक्षा जांच की जाती है। गाड़ियों के रूट से लेकर उनके आसपास के इलाके तक को पहले से सैनिटाइज किया जाता है।
शी जिनपिंग की सुरक्षा में सामान्य सुरक्षा जांच के साथ-साथ असामान्य खतरों को लेकर भी तैयारी की गई है। सुरक्षा एजेंसियां संभावित केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर (CBRN) खतरों की पहचान और उनसे निपटने के लिए भी तैयार हैं। इसके लिए विशेष उपकरणों और प्रशिक्षित टीमों की मदद ली जाती है। किसी संदिग्ध वस्तु या पदार्थ के मिलने पर उसकी तत्काल जांच की जा सके, इसके लिए सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है।
शी जिनपिंग की भारत यात्रा के दौरान सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक बड़ी चुनौती संभावित विरोध प्रदर्शन भी है। तिब्बती एक्टिविस्ट लंबे समय से चीन की नीतियों का विरोध करते रहे हैं। ऐसे में शी जिनपिंग की भारत यात्रा के दौरान किसी तरह के प्रदर्शन या नारेबाजी की आशंका को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा बढ़ाई गई है। खुफिया एजेंसियां संभावित प्रदर्शनकारियों और संवेदनशील इलाकों पर नजर रख रही हैं। कोशिश है कि कोई भी प्रदर्शन शी जिनपिंग के कार्यक्रम या उनके काफिले के आसपास न पहुंच सके।
सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब खतरा सिर्फ जमीन पर होने वाले प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। ड्रोन, गुब्बारे, बैनर और लाउडस्पीकर जैसी चीजों के जरिए भी विरोध जताने की आशंका जताई गई है। इसी वजह से कम ऊंचाई पर उड़ने वाली छोटी हवाई वस्तुओं की पहचान के लिए निगरानी बढ़ाई गई है। किसी भी अनधिकृत यूएवी या ड्रोन को सुरक्षा क्षेत्र में प्रवेश करने से रोकने के लिए एंटी-ड्रोन सिस्टम और दूसरी तकनीकी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है।
शी जिनपिंग की यात्रा को देखते हुए भारत की तरफ से भी कई विशेष सुरक्षा व्यवस्थाओं की अनुमति दी गई है। इनमें उनके काफिले की आवाजाही, हवाई क्षेत्र में प्रतिबंध, सुरक्षा जांच, होटल के आसपास निगरानी और विशेष सुरक्षा टीमों की तैनाती जैसे कदम शामिल हैं। भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे ऑपरेशन को अलग-अलग स्तर पर संभाल रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था में दिल्ली पुलिस के साथ केंद्रीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के अधिकारी भी शामिल हैं।
शी जिनपिंग की भारत यात्रा भले ही करीब 24 घंटे की हो, लेकिन उनके दौरे की सुरक्षा के लिए तैयारियां काफी पहले शुरू कर दी गई थीं। जिस होटल में वह ठहरेंगे, वहां से लेकर एयरपोर्ट, कार्यक्रम स्थल और उनके काफिले के रास्तों तक की सुरक्षा को पहले से तैयार किया गया है। रूट पर मौजूद इमारतों, महत्वपूर्ण स्थानों और संवेदनशील पॉइंट्स की निगरानी की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह सुनिश्चित करने में जुटी हैं कि शी जिनपिंग की यात्रा के दौरान कोई ऐसी घटना न हो, जिससे भारत में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन की सुरक्षा या उसकी छवि पर असर पड़े।
दरअसल, किसी राष्ट्राध्यक्ष की सुरक्षा केवल उनके आसपास तैनात सुरक्षाकर्मियों तक सीमित नहीं होती। इसमें होटल, वाहन, भोजन, हवाई क्षेत्र, सड़क मार्ग, कार्यक्रम स्थल और आसपास मौजूद लोगों तक की निगरानी शामिल होती है। शी जिनपिंग की इस यात्रा में भी भारत ने सुरक्षा के लगभग हर पहलू को कवर करने की कोशिश की है।


