शिमला: हिमाचल प्रदेश में जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर सरकार की ओर से विधानसभा में चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। प्रदेश में हजारों मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता रखने वाली सैकड़ों हाइड्रो परियोजनाएं अभी जमीन पर नहीं उतर पाई हैं। सरकार ने विधानसभा में लिखित जवाब में बताया कि 7,621 मेगावाट क्षमता वाली 527 जलविद्युत परियोजनाएं फिलहाल लंबित हैं।
इन परियोजनाओं को लेकर टेंडर प्रक्रिया चल रही है और निर्माण कार्य शुरू होने में अभी समय लगेगा।
यह जानकारी विधायक हंसराज की ओर से विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में दी गई। सरकार की ओर से मुख्यमंत्री ने लिखित जवाब में प्रदेश में स्वीकृत जलविद्युत परियोजनाओं और उनकी मौजूदा स्थिति का ब्योरा सदन के सामने रखा।
प्रदेश में 773 हाइड्रो परियोजनाएं स्वीकृत
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में कुल 773 जलविद्युत परियोजनाओं को स्वीकृति दी जा चुकी है। इन परियोजनाओं की कुल प्रस्तावित क्षमता करीब 21,751 मेगावाट है। हिमाचल में बड़ी संख्या में नदियां और जलस्रोत होने के कारण बिजली उत्पादन के क्षेत्र में प्रदेश को लंबे समय से संभावनाओं वाला राज्य माना जाता रहा है। स्वीकृति मिलने के बाद भी सभी परियोजनाएं निर्माण के चरण तक नहीं पहुंच सकी हैं। सरकार के मुताबिक 527 परियोजनाएं ऐसी हैं, जिनकी कुल क्षमता 7,621 मेगावाट है और इनके लिए प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।
टेंडर प्रक्रिया चल रही, नवंबर के बाद शुरू होगा काम
विधानसभा में दिए गए जवाब में सरकार ने बताया कि इन लंबित परियोजनाओं के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है। यानी परियोजनाओं को स्वीकृति मिलने के बावजूद निर्माण एजेंसी और अन्य प्रक्रियाओं को अंतिम रूप देने का काम अभी बाकी है। सरकार के अनुसार निर्माण कार्य नवंबर के बाद ही शुरू हो सकेगा। ऐसे में इन परियोजनाओं से बिजली उत्पादन शुरू होने में अभी और वक्त लग सकता है। परियोजनाओं के निर्माण में देरी का सीधा असर प्रदेश की संभावित बिजली उत्पादन क्षमता पर भी पड़ सकता है।
हजारों मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता
हिमाचल प्रदेश में जलविद्युत को बिजली उत्पादन का प्रमुख स्रोत माना जाता है। राज्य की नदियों और पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों को हाइड्रो पावर के लिए अनुकूल माना जाता है। यही वजह है कि अलग-अलग क्षेत्रों में छोटी और बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। सरकार के आंकड़ों पर नजर डालें तो 773 स्वीकृत परियोजनाओं की कुल क्षमता 21,751 मेगावाट है। इनमें से 527 परियोजनाओं की 7,621 मेगावाट क्षमता अभी लंबित है। इससे पता चलता है कि स्वीकृत परियोजनाओं का एक बड़ा हिस्सा अभी निर्माण की प्रक्रिया में आगे नहीं बढ़ पाया है।
परियोजनाओं में देरी से बढ़ती है लागत की चिंता
हाइड्रो परियोजनाओं के निर्माण में देरी होने पर परियोजना की लागत बढ़ने की संभावना रहती है। जमीन, निर्माण सामग्री, मशीनरी और अन्य खर्च समय के साथ बढ़ सकते हैं। ऐसे में अगर परियोजनाओं को समय पर शुरू नहीं किया जाता तो भविष्य में इनकी लागत का बोझ भी बढ़ सकता है। दूसरी ओर, इन परियोजनाओं के शुरू होने से प्रदेश में बिजली उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है। इससे राज्य को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ अतिरिक्त बिजली से राजस्व हासिल करने में भी मदद मिल सकती है।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
विधानसभा में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि हिमाचल के हाइड्रो सेक्टर में बड़ी संभावनाएं होने के बावजूद परियोजनाओं को धरातल पर उतारना सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है। 527 परियोजनाओं के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर निर्माण शुरू करवाना अब सरकार के सामने बड़ा काम है। सरकार की ओर से नवंबर के बाद निर्माण कार्य शुरू होने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले महीनों में यह देखना होगा कि लंबित परियोजनाओं की टेंडर प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी होती है और निर्माण कार्य तय समय के अनुसार शुरू हो पाता है या नहीं।
बिजली उत्पादन बढ़ाने पर टिकी नजर
हिमाचल प्रदेश में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में नई जलविद्युत परियोजनाओं को शुरू करना राज्य के लिए लंबे समय की ऊर्जा रणनीति का हिस्सा है। 7,621 मेगावाट क्षमता वाली इन 527 परियोजनाओं के शुरू होने पर प्रदेश की बिजली उत्पादन क्षमता में बड़ा इजाफा हो सकता है। विधानसभा में सरकार के लिखित जवाब ने यह साफ कर दिया है कि परियोजनाओं को मंजूरी मिलने के बावजूद बड़ी संख्या में हाइड्रो प्रोजेक्ट अभी निर्माण की कतार में हैं। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि टेंडर प्रक्रिया कब पूरी होती है और नवंबर के बाद इन परियोजनाओं पर जमीन पर कितना काम शुरू हो पाता है।


