चित्रकूट: मंदाकिनी नदी के उफान ने चित्रकूट में बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी है। रामघाट समेत नदी किनारे के कई इलाकों में पानी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे हालात में प्रशासन लगातार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटा है। इसी दौरान रामघाट स्थित बड़ा मठ में आस्था और कर्तव्य की ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
बड़ा मठ के पुजारी ने बाढ़ के बीच मंदिर छोड़कर सुरक्षित स्थान पर जाने से साफ इनकार कर दिया। उन्हें समझाने के लिए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक खुद मौके पर पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने पुजारी से मंदिर खाली कर सुरक्षित जगह जाने की अपील की। बताया जा रहा है कि अधिकारियों ने हाथ जोड़कर भी उनसे आग्रह किया, लेकिन पुजारी अपने फैसले पर अड़े रहे।
‘भगवान को अकेला छोड़कर मैं कैसे चला जाऊं?’
पुजारी का कहना था कि मंदिर में भगवान की सेवा और पूजा की जिम्मेदारी उनकी है। ऐसे समय में जब चारों तरफ पानी है, वह भगवान को अकेला छोड़कर सुरक्षित जगह नहीं जा सकते। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि अगर हालात इतने खराब हैं तो भी वह मंदिर छोड़कर नहीं जाएंगे। उनका कहना था कि ‘भगवान को अकेला छोड़कर मैं कैसे चला जाऊं?
मेरी जिंदगी यहीं बीतेगी और यहीं कटेगी।’ पुजारी की बात सुनकर मौके पर मौजूद अधिकारी भी कुछ देर के लिए भावुक नजर आए। प्रशासन की कोशिश थी कि बाढ़ का पानी बढ़ने की स्थिति में पुजारी की जान को खतरा न हो, लेकिन पुजारी मंदिर में ही रहने की जिद पर कायम रहे।
मंदाकिनी के बढ़ते जलस्तर ने बढ़ाई चिंता
चित्रकूट में लगातार बारिश और जलस्तर बढ़ने से मंदाकिनी नदी उफान पर है। रामघाट के आसपास नदी का पानी बढ़ने के कारण प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है। प्रशासन की टीमें संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं।
पुलिस और स्थानीय प्रशासन के कर्मचारी लोगों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से बाहर निकालने में जुटे हैं। नाव और दूसरे राहत संसाधनों को भी तैयार रखा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके।
डीएम-एसपी ने खुद संभाली कमान
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी और एसपी ने प्रभावित इलाकों का जायजा लिया। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थानीय लोगों से बातचीत की और उन्हें किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाने की अपील की। इसी दौरान उनकी नजर बड़ा मठ के पुजारी पर पड़ी। प्रशासन को चिंता थी कि अगर मंदाकिनी का जलस्तर और बढ़ा तो मंदिर परिसर में रहना खतरनाक हो सकता है।
अधिकारियों ने पुजारी को सुरक्षित स्थान पर चलने के लिए समझाया। काफी देर तक बातचीत के बाद भी जब पुजारी तैयार नहीं हुए तो अधिकारियों ने हाथ जोड़कर उनसे आग्रह किया। लेकिन पुजारी ने स्पष्ट कर दिया कि वह मंदिर और भगवान को छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे।
‘जो होगा, भगवान की इच्छा से होगा’
पुजारी का कहना था कि वह लंबे समय से मंदिर में भगवान की सेवा कर रहे हैं। बाढ़ या किसी भी मुश्किल परिस्थिति में उनका स्थान मंदिर के पास ही है। उन्होंने प्रशासन से कहा कि उनकी चिंता न की जाए। उनका भाव था कि ‘जो होगा, भगवान की इच्छा से होगा।’ पुजारी की इस बात ने वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया। बाढ़ जैसी मुश्किल परिस्थिति में जहां प्रशासन लोगों की जान बचाने के लिए उन्हें सुरक्षित स्थानों पर भेज रहा है, वहीं पुजारी का मंदिर छोड़ने से इनकार आस्था की एक अलग तस्वीर पेश कर रहा है।
प्रशासन के लिए चुनौती भी बना पुजारी का फैसला
पुजारी की आस्था और भावना अपनी जगह है, लेकिन प्रशासन के लिए उनकी सुरक्षा भी बड़ी जिम्मेदारी है। अधिकारियों की चिंता यही है कि अगर पानी अचानक बढ़ता है तो मंदिर में फंसे व्यक्ति को बाहर निकालना मुश्किल हो सकता है। प्रशासन की ओर से लगातार हालात पर नजर रखी जा रही है। पुजारी को समझाने की कोशिश भी जारी है, ताकि उनकी आस्था का सम्मान करते हुए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
चित्रकूट में बाढ़ के बीच सामने आया यह मामला अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ प्रशासन लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटा है, तो दूसरी तरफ बड़ा मठ के पुजारी भगवान के साथ मंदिर में रहने के अपने फैसले पर अडिग हैं। बाढ़ के तेज बहाव और बढ़ते जलस्तर के बीच पुजारी का यह कहना कि ‘भगवान को छोड़कर नहीं जाऊंगा, यहीं कटेगी जिंदगी’ लोगों के बीच आस्था और समर्पण की मिसाल बन गया है।


