Gonda News: व्यवस्था की उदासीनता और प्रशासनिक ढिलाई ने एक मजदूर की जान ले ली। घाघरा नदी में मगरमच्छ के हमले का शिकार हुए भानु प्रताप ने इलाज के 34 दिनों बाद लखनऊ के मेडिकल कॉलेज में दम तोड़ दिया। इस दुखद घटना ने स्थानीय स्वास्थ्य सुविधाओं और सरकारी मदद पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। Gonda News
यह है पूरी घटना
बीते 24 जून को भानु प्रताप अपने दैनिक कार्यों के सिलसिले में घाघरा नदी के तट पर गए थे। इसी दौरान एक मगरमच्छ ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में भानु प्रताप गंभीर रूप से घायल हो गए थे। परिजनों का आरोप है कि घटना के तुरंत बाद उन्हें न तो समय पर उचित चिकित्सा सहायता मिली और न ही प्रशासन की ओर से त्वरित आर्थिक मदद सुनिश्चित की गई। Gonda News
नदी में मगरमच्छ का खतरा
परिजनों का कहना है कि भानु प्रताप को इलाज के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकना पड़ा। घाघरा नदी के तटीय क्षेत्रों में मगरमच्छों का खतरा हमेशा बना रहता है, बावजूद इसके स्थानीय स्तर पर न तो कोई सुरक्षा तंत्र मौजूद है और न ही आपातकालीन चिकित्सा की पुख्ता व्यवस्था। Gonda News
परिजन अत्यंत आक्रोशित हैं। उनका आरोप है कि सरकारी सिस्टम की ‘सड़ियल’ कार्यप्रणाली के कारण ही भानु प्रताप को 34 दिनों तक तड़पना पड़ा। लखनऊ के मेडिकल कॉलेज में बेहतर इलाज के प्रयासों के बावजूद संक्रमण और घावों की गंभीरता के चलते उनकी सांसें थम गईं। Gonda News
प्रशासन की चुप्पी
गरीब मजदूर की मौत के बाद क्षेत्र में शोक और आक्रोश की लहर दौड़ गई है। हालांकि अभी तक स्थानीय प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की राहत राशि या विभागीय जांच की घोषणा नहीं की गई है। इस मामले में पीड़ित परिवार अब न्याय और उचित मुआवजे की मांग कर रहा है। Gonda News
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यह घटना न केवल घाघरा किनारे रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी है, बल्कि यह जिला प्रशासन की संवेदनशीलता पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है। क्या एक गरीब मजदूर की जान की कीमत इतनी सस्ती है कि उसे समय पर उपचार भी नसीब न हो सके?


