मायावती ने ईशान आनंद को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी, भाई-भतीजे के साथ पार्टी की बैठक - Nation27 >

बहुजन समाज पार्टी में अपने उत्तराधिकारी को लेकर बड़ी उठापटक चल रही है। कांशीराम और मायावती की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए बसपा को एक उत्तराधिकारी की आवश्यकता है। जिसे भरने के लिए पहले मायावती ने अपने भाई के ज्येष्ठ पुत्र आकाश को मौका दिया था, लेकिन आकाश मायावती की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरे जिसके बाद मायावती ने अपने भाई आनंद के छोडे बेटे ईशान को मौका देकर वापस ले लिया था। एक बार फिर मायावती ने अपने भाई और छोटे भतीजे को पार्टी की जिम्मेदारी देने का मन बनाया है।

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने आज लखनऊ स्थित प्रदेश कार्यालय में हुई अखिल भारतीय बैठक के दौरान अपने भतीजे ईशान आनंद पर एक बार फिर भरोसा जताया है। यह बैठक बीते एक महीने में हुई पार्टी की दूसरी बड़ी राष्ट्रीय बैठक थी, जिसमें देशभर के वरिष्ठ पदाधिकारी, राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय स्तर के कार्यकर्ता शामिल हुए। बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों, संगठन की मजबूती और उम्मीदवारों के चयन जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। गौरतलब है कि इससे पहले मायावती अपने बड़े भतीजे आकाश आनंद को पार्टी का उत्तराधिकारी घोषित कर चुकी थीं, लेकिन बीते कुछ महीनों में उन्हें राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाकर पार्टी गतिविधियों से मुक्त कर आजाद कर दिया गया था। इसके बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि परिवार से किसी और सदस्य को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। मायावती ने साफ कर दिया था कि आनंद कुमार के परिवार से अब सिर्फ ईशान आनंद को ही पार्टी में आगे बढ़ाया जाएगा, जबकि आकाश और उनकी बहन को कोई पद नहीं दिया जाएगा।


27 वर्षीय ईशान आनंद, मायावती के भाई और बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार के छोटे बेटे हैं। लंदन से कानून की पढ़ाई कर चुके ईशान को पहले ही पार्टी में मुख्य सेक्टर प्रभारी बनाया जा चुका था, जिसके तहत उन्हें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को छोड़कर बाकी राज्यों के संगठनात्मक कामकाज की समीक्षा का जिम्मा मिला था। वे इस बारे में सीधे मायावती और अपने पिता आनंद कुमार को रिपोर्ट करते हैं।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ईशान आनंद की बढ़ती भूमिका को दलित युवाओं और शिक्षित कैडर से जुड़ाव बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि मायावती ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में ईशान की गतिविधियां पार्टी हित के खिलाफ पाई गईं, तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले यह फैसला बसपा की रणनीति और परिवार की भूमिका, दोनों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

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