मथुरा जंक्शन पर जीआरपी का एक बेहद संवेदनहीन और अमानवीय चेहरा सामने आया है, जिसने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। मामला शेरगढ़ क्षेत्र के बसई गांव की एक बुजुर्ग महिला से जुड़ा है, जो दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज कराने के बाद ट्रेन से अपने घर लौट रही थीं। मथुरा जंक्शन पर ट्रेन से उतरते समय उनकी अचानक मौत हो गई, जिससे परिवार में कोहराम मच गया।
घटना के बाद घबराए हुए परिजनों ने तुरंत मदद की कोशिश की। उन्होंने महिला के शव को स्टेशन पर मौजूद एक व्हीलचेयर पर बैठाया और जैसे-तैसे उसे जंक्शन के गेट तक लेकर आए। इसी दौरान परिजनों ने आपातकालीन सेवा नंबर 112 पर कॉल कर एम्बुलेंस और स्ट्रेचर मांगा, ताकि शव को सम्मानपूर्वक घर तक पहुंचाया जा सके।
इस घटना ने पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची जीआरपी पुलिस ने परिवार की सहायता करने के बजाय मृतका के बेटे को निजी वाहन का प्रबंध करने के लिए करीब 10 किलोमीटर दूर भेज दिया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मृतका की बेटी अपनी मां के शव के पास अकेली बैठी रही और वहां से गुजर रहे राहगीरों से मदद की गुहार लगाती नजर आई।
काफी देर बाद जब बेटा किसी तरह निजी वाहन का इंतजाम कर वापस पहुंचा, तब जाकर परिवार अपनी मां का शव घर ले जा सका। इस दौरान परिवार को जो मानसिक पीड़ा और असहायता झेलनी पड़ी, उसकी कल्पना मात्र से ही दिल दहल जाता है।
जंक्शन पर मौजूद कई यात्रियों ने इस दिल दहला देने वाली घटना को अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया। देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन और जीआरपी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों ने इस घटना को पुलिस की संवेदनहीनता का जीता-जागता उदाहरण बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आपातकालीन स्थितियों में जिम्मेदार बल आम नागरिकों की सहायता के लिए कितना संवेदनशील है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जीआरपी ने सहयोग किया होता, तो परिवार को इतनी पीड़ा से नहीं गुजरना पड़ता।


