श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा-वृंदावन पूरी तरह कृष्ण भक्ति में रंग गया है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर से लेकर शहर की गलियों तक हर तरफ ‘जय श्री कृष्ण’, ‘राधे-राधे’ और ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारे सुनाई दे रहे हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु कान्हा की एक झलक पाने और उनके जन्मोत्सव के ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए मथुरा पहुंच रहे हैं।

श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर सुबह से ही भक्तों की कतारें लगी हुई हैं। जैसे-जैसे रात करीब आ रही है, श्रद्धालुओं का उत्साह भी बढ़ता जा रहा है। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। जन्मस्थान की ओर जाने वाले रास्तों पर भी भक्तों की भारी भीड़ नजर आ रही है।

आधी रात को होगा कान्हा का प्राकट्य

भक्तों को जिस पल का बेसब्री से इंतजार है, वह रात 12 बजे आएगा। मान्यता के अनुसार इसी पावन बेला में भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा की धरती पर जन्म लिया था। घड़ी की सुई जैसे ही मध्यरात्रि के 12 बजे पर पहुंचेगी, मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठेगा। इस खास अवसर पर भगवान के चल विग्रह को कमल पुष्प पर विराजमान कराया जाएगा।

इसके बाद विधि-विधान के साथ महाभिषेक की परंपरा पूरी की जाएगी। पंचामृत और विभिन्न पूजन सामग्रियों से होने वाले अभिषेक के दौरान श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का दिव्य दृश्य देखने के लिए उत्सुक रहेंगे। महाभिषेक के बाद विशेष आरती होगी। शंख और घंटियों की ध्वनि के बीच जब भगवान श्रीकृष्ण की आरती उतारी जाएगी, तो पूरा जन्मस्थान परिसर भक्तिभाव से भर जाएगा।

5253वें जन्मोत्सव को लेकर ब्रज में उत्साह

इस बार ब्रज में श्रीकृष्ण के 5253वें जन्मोत्सव को लेकर खास उत्साह दिखाई दे रहा है। मथुरा, वृंदावन, गोकुल, बरसाना और नंदगांव समेत पूरे ब्रज क्षेत्र में कई दिनों से जन्माष्टमी की तैयारियां चल रही थीं। मंदिरों को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है। ब्रजवासी भी कान्हा के जन्म की इस रात को लेकर उत्साहित हैं। घरों और मंदिरों में विशेष पूजा की तैयारियां की गई हैं। कई जगह भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। गलियों में कृष्ण नाम की धुन और मंदिरों से आती घंटियों की आवाज माहौल को और खास बना रही है।

कान्हा की एक झलक के लिए घंटों इंतजार

श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर भक्तों की भीड़ का आलम यह है कि लोग घंटों कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। कई श्रद्धालु परिवार के साथ पहुंचे हैं तो बड़ी संख्या में लोग दूर-दराज के शहरों से भी यहां आए हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि कृष्ण जन्मभूमि पर आकर भगवान के जन्मोत्सव में शामिल होना उनके लिए बेहद खास अनुभव है। कई भक्तों ने व्रत रखा है और रात 12 बजे भगवान के जन्म के बाद ही व्रत खोलने की तैयारी की है।

मंदिरों में सजावट और भक्ति कार्यक्रम

जन्माष्टमी को लेकर मथुरा और वृंदावन के प्रमुख मंदिरों में विशेष सजावट की गई है। कहीं फूलों से झांकियां सजाई गई हैं तो कहीं भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को विशेष श्रृंगार कराया गया है। मंदिरों में सुबह से ही पूजा-पाठ, भजन और कीर्तन का सिलसिला जारी है। बांके बिहारी मंदिर, द्वारकाधीश मंदिर और अन्य प्रमुख मंदिरों में भी जन्माष्टमी का अलग रंग देखने को मिल रहा है। वृंदावन की गलियों में श्रद्धालुओं की भीड़ और मंदिरों में गूंजते भजनों ने पूरे शहर को कृष्णमय बना दिया है।

सुरक्षा के बीच भक्तों की भीड़ को संभालने की तैयारी

लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन और पुलिस की ओर से सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। प्रमुख मंदिरों और भीड़ वाले क्षेत्रों में पुलिस बल की तैनाती की गई है। श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित रखने के लिए कई स्थानों पर बैरिकेडिंग और रूट डायवर्जन की व्यवस्था की गई है। प्रशासन की कोशिश है कि जन्माष्टमी के दौरान श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो और मध्यरात्रि के कार्यक्रम के दौरान भीड़ को नियंत्रित तरीके से मंदिर परिसर तक पहुंचाया जा सके।

ब्रज में आज रात सिर्फ कान्हा का नाम

जैसे-जैसे मध्यरात्रि करीब आ रही है, भक्तों की बेसब्री बढ़ती जा रही है। हर किसी की नजर घड़ी की सुइयों पर टिकी है। इंतजार उस पल का है जब ठीक रात 12 बजे नंदलाल के जन्म की घोषणा होगी और पूरा ब्रज एक साथ जयकारों से गूंज उठेगा। उस समय मंदिरों में शंखनाद होगा, घंटियां बजेंगी और भक्त ‘जय कन्हैया लाल की’ के जयकारे लगाएंगे। भगवान के जन्म के बाद होने वाला महाभिषेक और दिव्य आरती जन्माष्टमी के इस उत्सव का सबसे खास पल होगा। मथुरा में इस समय हर रास्ता जन्मस्थान की ओर जाता दिखाई दे रहा है और हर जुबान पर एक ही नाम है, कान्हा।

Share.
Leave A Reply

© 2026 Nation27

Exit mobile version