प्रयागराज कमिश्नरेट में पुलिस विभाग ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए पूरी स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) टीम को भंग कर दिया है। पुलिस आयुक्त पीयूष मोर्डिया के इस फैसले के बाद महकमे में हलचल तेज हो गई है। SOG में तैनात 44 पुलिसकर्मियों को भी हटा दिया गया है। कार्रवाई के बाद अब इस टीम में तैनात पुलिसकर्मियों को अलग-अलग थानों और अन्य पुलिस इकाइयों में भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब प्रयागराज में हाल ही में MDMA तैयार करने वाली फैक्टरी का खुलासा हुआ था। पुलिस ने एक बड़े ड्रग नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए फैक्टरी पकड़ी थी। इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे थे। हालांकि, SOG को भंग करने का सीधा संबंध इसी मामले से है या नहीं, पुलिस अधिकारियों की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

पूरी टीम को ही कर दिया गया भंग

प्रयागराज कमिश्नरेट में अपराधों पर नजर रखने और गंभीर मामलों की जांच में मदद करने के लिए SOG की भूमिका काफी अहम मानी जाती रही है। किसी बड़े अपराध, गैंग, अवैध हथियार, मादक पदार्थ या संगठित अपराध से जुड़े मामलों में SOG की टीमें स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई करती हैं।

ऐसे में अचानक पूरी SOG को भंग किए जाने के फैसले ने पुलिस महकमे के भीतर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि केवल कुछ पुलिसकर्मियों को हटाने के बजाय पूरी टीम को ही खत्म कर दिया गया है। टीम में शामिल करीब 44 पुलिसकर्मियों को अब उनकी नई तैनाती दी जाएगी।

MDMA फैक्टरी के बाद बढ़ी चर्चा

प्रयागराज में MDMA बनाने वाली फैक्टरी पकड़े जाने के बाद से यह मामला काफी चर्चा में रहा है। जांच एजेंसियों ने इस नेटवर्क से जुड़े लोगों और पूरे सप्लाई सिस्टम की पड़ताल शुरू की है। मामला केवल स्थानीय स्तर पर नशीले पदार्थ की बरामदगी तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके पीछे जुड़े नेटवर्क और अन्य कड़ियों की भी जांच की जा रही है।

इसी बीच SOG की पूरी टीम को भंग किए जाने से विभागीय हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। पुलिस की ओर से अब तक यह नहीं कहा गया है कि SOG पर हुई कार्रवाई MDMA फैक्टरी प्रकरण में किसी लापरवाही या चूक की वजह से की गई है।

पुलिस आयुक्त के फैसले से महकमे में खलबली

पुलिस आयुक्त पीयूष मोर्डिया के आदेश के बाद SOG में तैनात सभी 44 पुलिसकर्मियों को हटाया गया है। इस फैसले को पुलिस कमिश्नरेट में एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल के तौर पर देखा जा रहा है। पुलिस विभाग में SOG को ऐसी टीम माना जाता है, जिसे संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण मामलों में लगाया जाता है।

इसलिए पूरी टीम को एक साथ भंग करने का फैसला सामान्य स्थानांतरण या रूटीन बदलाव से अलग माना जा रहा है। अधिकारियों की तरफ से फिलहाल इतना ही स्पष्ट किया गया है कि SOG को भंग कर दिया गया है और टीम में तैनात पुलिसकर्मियों को हटाया गया है। कार्रवाई की विस्तृत वजह को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

नई टीम को लेकर भी नजर

अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि प्रयागराज कमिश्नरेट में SOG की जगह आगे किस तरह की व्यवस्था तैयार की जाती है। क्या नई टीम का गठन किया जाएगा या फिर गंभीर मामलों की जिम्मेदारी किसी दूसरी यूनिट को दी जाएगी, इसे लेकर भी पुलिसकर्मियों के बीच चर्चा है। SOG जैसी यूनिट के भंग होने के बाद अपराध नियंत्रण और गंभीर मामलों में त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था पर भी लोगों की नजर रहेगी। खासकर प्रयागराज जैसे बड़े शहर में, जहां लगातार अपराध और संगठित गिरोहों से जुड़े मामलों पर पुलिस को काम करना पड़ता है, वहां ऐसी यूनिट की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

आधिकारिक वजह का इंतजार

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर पूरी SOG टीम को एक साथ क्यों भंग किया गया। MDMA फैक्टरी पकड़े जाने के बाद हुई यह कार्रवाई कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे रही है, लेकिन दोनों घटनाओं के बीच सीधे संबंध की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

पुलिस विभाग की ओर से यदि आगे कार्रवाई की वजह, नई तैनाती या किसी विभागीय जांच को लेकर जानकारी सामने आती है, तो तस्वीर और साफ हो सकती है। फिलहाल 44 पुलिसकर्मियों को हटाए जाने और पूरी SOG टीम के भंग होने के बाद प्रयागराज पुलिस कमिश्नरेट में इसे बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

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