"परवरिश सिर्फ मां का फर्ज नहीं": मुरादाबाद फैमिली कोर्ट ने तय की नजीर - Nation27 >

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद स्थित परिवार न्यायालय ने पारिवारिक विवाद के बीच दो मासूम बच्चों के हक में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने पेशे से डॉक्टर पिता को अपने दोनों बेटों की पढ़ाई, ट्यूशन, बस फीस और दैनिक खर्चों के लिए प्रतिमाह 1.20 लाख रुपये का अंतरिम भरण-पोषण (मेंटेनेंस) देने का कड़ा निर्देश दिया है। यह राशि याचिका दाखिल करने की तिथि से लागू मानी जाएगी।

वर्ष 2009 में डॉक्टर दंपति का विवाह हुआ था, लेकिन लगभग डेढ़ साल पहले आपसी विवाद के कारण दोनों अलग रहने लगे। इसके बाद से ही पेशे से डॉक्टर मां अकेले ही 14 साल और 11 साल के अपने दोनों बेटों की परवरिश कर रही थीं। उन्होंने वित्तीय और मानसिक चुनौतियों के बावजूद अकेले ही बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, कोचिंग और अन्य सभी खर्चों का बोझ निष्ठापूर्वक उठाया।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि बच्चों का सर्वांगीण विकास केवल मां का नहीं, बल्कि माता-पिता दोनों का साझा दायित्व है। अधिवक्ता के माध्यम से दायर इस याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट में मजबूती से पक्ष रखा गया था। मां के मुकाबले पिता की आर्थिक स्थिति अधिक सुदृढ़ है। पिता की बेहतर वित्तीय स्थिति और बच्चों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने यह अहम फैसला सुनाया।

कोर्ट ने पिता को हर महीने रुपये 1.20 लाख मेंटेनेंस देने का आदेश दिया है। आदेश में कहा गया है कि डॉ. पिता को यह राशि हर महीने की 10 तारीख तक बैंक खाते में जमा करानी होगी। पारिवारिक कलह के बीच आया यह निर्णय बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक बड़ी नजीर साबित होगा। कोर्ट का यह फैसला इस नजरिए से भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पति पत्नि के बीच तलाक के बाद बच्चों के भरण पोषण की जिम्मेदारी तय करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

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