हरियाणवी सिंगर और यूट्यूबर अंकित बालियान की हत्या के मामले में यूपी पुलिस और एसटीएफ को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। बीते दिनों शामली जिले में एक जिम से बाहर निकलते समय अंकित बालियान को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस के मुताबिक चार अज्ञात हमलावर दो गाड़ियों में वहां पहुंचे थे और अंकित पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दी थीं, जिसमें गंभीर रूप से घायल होने के बाद उनकी मौत हो गई थी।
घटना के करीब पांच दिन बाद शामली की सदर कोतवाली क्षेत्र में पुलिस ने आरोपियों को दबोचने के लिए विशेष अभियान चलाया। इसी दौरान संदिग्धों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी, जिसके जवाब में पुलिस की कार्रवाई में दोनों आरोपी सुमित और मोहित मारे गए। इस मुठभेड़ में दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए, जिन्हें तुरंत इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
शामली एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार आरोपियों ने पुलिस पर गोली चलाई, जिसके बाद पुलिस टीम ने पूरी सतर्कता के साथ जवाबी कार्रवाई की। जांच में सामने आया है कि इस हत्याकांड में कुल छह लोग शामिल थे, जिनमें से चार सीधे तौर पर फायरिंग में शामिल थे। पुलिस अब बाकी बचे आरोपियों की तलाश में जुटी है।
यह मुठभेड़ एक बार फिर योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति की चर्चा को हवा दे गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 से अब तक प्रदेश पुलिस अपराधियों के खिलाफ 15 हजार से अधिक मुठभेड़ें कर चुकी है, जिनमें करीब 289 कुख्यात अपराधी मारे जा चुके हैं। सरकार का कहना है कि इस नीति के तहत अपराधियों को साफ संदेश दिया गया है कि प्रदेश में रहना है तो अपराध छोड़ना होगा, वरना कानून का सामना करना पड़ेगा।
योगी सरकार में हुए एनकाउंटरों में विकास दुबे का मामला सबसे अधिक चर्चित रहा था, जो देशभर में सुर्खियों में छाया रहा। हालांकि विपक्षी दल समय-समय पर इन मुठभेड़ों की निष्पक्ष जांच की मांग उठाते रहे हैं, लेकिन सरकार का रुख साफ है कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई में कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। अंकित बालियान हत्याकांड में हुई इस त्वरित कार्रवाई को भी सरकार की इसी नीति की एक और मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है।


