उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में गंगा एक्सप्रेसवे को बिजनौर होते हुए हरिद्वार तक विस्तारित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच सड़क संपर्क को नई मजबूती मिलेगी।
इस परियोजना के तहत बनने वाले विस्तार की अनुमानित लंबाई लगभग 147 किलोमीटर होगी। यह प्रस्तावित एक्सप्रेसवे एक ग्रीनफील्ड कॉरिडोर होगा, जिसका निर्माण शुरुआत में 6 लेन में किया जाएगा, हालांकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर इसे 8 लेन तक भी विस्तारित किया जा सकेगा।
इस विस्तार परियोजना पर करीब 10,761 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिसका पूरा वित्तीय भार उत्तर प्रदेश सरकार खुद वहन करेगी। अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना में केंद्र सरकार की किसी प्रकार की वित्तीय भागीदारी अपेक्षित या प्रस्तावित नहीं है।
समझौते के अनुसार उत्तराखंड सरकार पर निर्माण का कोई सीधा वित्तीय भार नहीं पड़ेगा, बल्कि वहां की सरकार भूमि अधिग्रहण और यूटिलिटी शिफ्टिंग जैसी प्रक्रियाओं में सहयोग करेगी। परियोजना से जुड़े दोनों राज्यों के बीच हुए एमओयू को पहले ही अंतिम रूप दिया जा चुका था, जिन्हें अब कैबिनेट से औपचारिक मंजूरी मिल गई है।
गंगा एक्सप्रेसवे के इस विस्तार से बिजनौर जिले को सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है। इससे बिजनौर की हरिद्वार के साथ-साथ प्रदेश की राजधानी लखनऊ और अन्य प्रमुख हिस्सों से कनेक्टिविटी बेहतर होगी। बेहतर सड़क संपर्क से जिले में व्यापार, उद्योग और पर्यटन को नई गति मिलने की संभावना है, जिससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
हरिद्वार तक सीधी और तेज कनेक्टिविटी होने से धार्मिक पर्यटन को भी बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हरिद्वार आने-जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अब कम समय में यह दूरी तय करने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि यह परियोजना प्रदेश के समग्र बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ अंतरराज्यीय संपर्क को भी नई दिशा देगी।

