कुशीनगर: नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद भारत के सीमावर्ती इलाकों में प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। नेपाल के उत्तरी हिस्से में आई जल प्रलय का असर अब नारायणी नदी पर भी दिखाई दे रहा है। नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है।
नेपाल की त्रिशूली नदी, जो नारायणी नदी की प्रमुख सहायक नदियों में से एक है, ने भारी तबाही मचाई है। वहीं उत्तरी नेपाल के रसुवा जिले में भोटे कोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ ने तिमुरे और स्याब्रुबेसी जैसे इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया। तेज बहाव में घर, वाहन और पुल तक बह गए।
स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, इस हादसे में अब तक कई लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल पर्यटन विभाग के अनुसार करीब 384 यात्री प्रभावित हुए हैं, जिनमें अलग-अलग देशों के पर्यटक शामिल हैं। प्रभावित लोगों में भारत के 100 से अधिक पर्यटक भी शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें कई लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा और गोसाईंकुंडा की ओर जा रहे थे।
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नारायणी नदी का बढ़ा जलस्तर
नेपाल से बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद नारायणी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। जानकारी के अनुसार दोपहर 12 बजे करीब 1 लाख 3 हजार क्यूसेक और शाम 4 बजे डेढ़ लाख से अधिक क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिसके बाद नदी किनारे बसे इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई।
डीएम और एसपी ने गांवों का किया दौरा
बढ़ते खतरे को देखते हुए प्रशासन ने नेपाल सीमा से जुड़े क्षेत्रों में निगरानी तेज कर दी है। डीएम और एसपी ने नारायणी नदी के किनारे बसे गांवों का दौरा कर हालात का जायजा लिया। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, लेकिन पूरी तरह सतर्क रहें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। फिलहाल प्रशासन नदी के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए है और संवेदनशील इलाकों में राहत एवं बचाव की तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
रिपोर्ट: राजकुमार गिरी
