भारत की सीमा से पकड़े गए एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिकों का मामला अब नया मोड़ ले चुका है। इन सभी सातों आरोपियों को जेल में करीब 180 दिन पूरे हो चुके हैं, और अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी NIA ने कोर्ट में जो चार्जशीट दाखिल की है, उसमें कड़े आतंकवाद विरोधी कानून यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) की धाराएं शामिल नहीं की गई हैं। जिसपर अब एनआईए ने स्पष्टीकरण दिया है।

एक अमेरिकी समेत 6 यूक्रेनी नागरिक गिरफ्तार
गौरतलब है कि 13 मार्च को अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरन वैन डाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों कामिंस्की विक्टर, हुर्बा पेत्रो, स्लिव्यक तारस, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफानकिव मारियन और होंचारुक मैक्सिम को देश के अलग-अलग हवाई अड्डों से हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद इस खबर पर पूरी दुनिया की नजर थी।

जांच में सामने आया कि ये सभी दिसंबर 2025 में पर्यटक वीजा पर भारत आए थे और फिर गुवाहाटी होते हुए मिजोरम पहुंचे, जहां बिना जरूरी परमिट (पीएपी) के वे भारत-म्यांमार सीमा पार कर म्यांमार के कैंप विक्टोरिया तक जा पहुंचे। एनआईए का आरोप है कि वहां इन्होंने जातीय सशस्त्र संगठनों (ईएओ) और पीपुल्स डिफेंस फोर्सेज (पीडीएफ) को ड्रोन संबंधी प्रशिक्षण दिया था।

विद्रोही गुटों से संबंध
शुरुआत में यह केस यूएपीए के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत दर्ज किया गया था, क्योंकि आरोप था कि यह पूरा नेटवर्क भाड़े के सैनिकों (मर्सिनरी) की तरह काम कर रहा था और पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय विद्रोही गुटों से भी इनके संबंध हो सकते हैं।

विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा की अदालत में दाखिल ताजा चार्जशीट में एनआईए ने केवल विदेशी नागरिक अधिनियम (इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट) की धारा 21 और 23 के तहत ही आरोप तय किए हैं। यानी अवैध प्रवेश, बिना अनुमति ठहराव और सीमा उल्लंघन जैसे मामलों तक बात सीमित रखी गई है।

एनआईए का स्पष्टीकरण
इस बदलाव पर सफाई देते हुए एनआईए ने कोर्ट को बताया कि आतंकी साजिश, ड्रोन प्रशिक्षण और सशस्त्र गुटों से जुड़े गंभीर आरोपों को साबित करने के लिए अभी और जांच की जरूरत है, इसलिए फिलहाल यूएपीए की धाराएं नहीं लगाई गई हैं। एजेंसी के मुताबिक, व्यापक साजिश के पहलुओं पर जांच जारी रहेगी और जरूरत पड़ने पर पूरक चार्जशीट में सख्त धाराएं जोड़ी जा सकती हैं।

सूत्रों के अनुसार एनआईए का दावा है कि चार्जशीट में यूएपीए का उल्लेख नहीं होने का यह मतलब नहीं है कि अमेरिकी नागरिक पर कोर्ट में यूएपीए के अंतर्गत केस नहीं चलेगा या यूएपीए वापस ले लिया गया है। इस केस में अभी भी जांच चल रही है।

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