सन 1966 में एक फिल्म आई थी ‘मेरा साया’। एक्ट्रेस साधना पर एक गीत फिल्माया गया था, ‘झुमका गिरा रे… बरेली के बाजार में… राजा मेहंदी अली खान के लिखे इस गीत ने बरेली को दुनिया भर में मशहूर कर दिया था। गाना सुनने वालों को लगने लगा कि बरेली का झुमका बहुत मशहूर है। दूर-दराज से शौकीन लोग बरेली के सर्राफा बाजार में बरेली का खास झुमका तलाशते हुए आज भी पहुंचते हैं। यहां आकर उन्हें पता चलता है कि बरेली का कोई झुमका है ही नही, न ही कोई खास डिजाइन है, जो कभी पॉपुलर रही हो। इस गीत को ध्यान से सुनें तो इसमें झुमके की नहीं बल्कि बरेली के बाजार की तारीफ है। यानी कभी यहां के बाजार में इतना रश होता था कि अगर झुमका गिर जाए तो उसे ढूंढ पाना मुश्किल था।
क्या है पूरा मामला
जिला बरेली, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और यूपी की राजधानी लखनऊ से बराबर दूरी पर बसा महत्वपूर्ण शहर है। कभी इसे द्रौपदी के मायके पांचाल के तौर पर जाना जाता था। तमाम तरह के बागात के अलावा यह इलाका बांसों के जंगल से घिरा हुआ था। तमाम जगहों पर बरेली को आज भी बांस बरेली कहा जाता है। इसे पहाड़ों का गेटवे भी कहा जाता था। पीलीभीत के जंगलों का रास्ता भी इसी शहर से हो कर जाता था। आसपास के शहर बदायूं, रामपुर, शाहजहांपुर और पीलीभीत के लिए भी बरेली बड़ा सेंटर था। यही वजह है कि पुराने समय से ही बरेली एक बड़े बाजार के तौर पर विकसित रहा है। अंग्रेजों ने यहां फौजी छावनी बनाई तो यह अंग्रेज ‘साहबों’ का रिहाइशी इलाका भी बन गया। इससे यहां का बाजार खूब फला-फूला। बरेली कपड़ों, जेवरात और बर्तन के लिए ही नहीं बल्कि शानदार टेलरिंग के लिए भी जाना जाता था। कहते हैं कि वूमेन के कोट कलकत्ता और दिल्ली के बाद बरेली के टेलर ही तैयार करते थे। इन खूबियों के वजह से नैनीताल के साथ ही दूसरे पहाड़ी जिलों के अलावा पीलीभीत, रामपुर, बदायूं, शाहजहांपुर जैसे तमाम शहरों के लोग बरेली खरीदारी करने आते थे। इसकी वजह से यहां बहुत ज्यादा रश होता था। गाने में उसी भीड़-भाड़ वाले बाजार का जिक्र है।
हर मोहल्ले की अपनी बाजार
ऐसा कम ही शहरों में देखा जाता है कि जहां हर मुहल्ले की अपनी एक छोटी बाजार हो, जहां जिंदगी का हर सामान मिलता हो। बरेली में मेन बाजार के अलावा हर मोहल्ले की अपनी एक बजरिया है। रोजमर्रा ही नहीं इसमें शादी-ब्याह के सारे सामान मिल जाते है। जेवरात और कपड़ों से लेकर बर्तन-भांडे और किराना से लेकर मेडिकल स्टोर तक होते है। खास बात यह है कि मेन बाजार से सस्ता सामान यहां मिलता है। यही वजह है कि यहां के लोग मेन बाजार की जगह यहीं पर खरीदारी करना पसंद करते हैं।
सात किलोमीटर लंबी बाजार वाली गली
बरेली में मेन रोड से अलग एक पैरलल गली जाती है जो पीलीभीत बाईपास स्थित बीसलपुर चौराहे से शुरू होकर किले मोहल्ले में जाकर निकलती है। यहां छोटे-बड़े कई बाजार सामाहित हैं। रास्ते पर मीरा की पैठ, सैलानी, शहामतगंज, बांसमंडी, आलमगीरीगंज, कुतुबखाना, बड़ा बाजार, साहूकारा और फिर किला का बाजार आता है। बीच में कई बजरिया भी आती हैं। किले पर यह गली बरेली-दिल्ली रोड पर जाकर मिल जाती है।
पीएम की तारीफ से मिला खोया हुआ झुमका
अब बात शहर में लगे विशाल झुमके की। दरअसल, यह बात है साल 2016 की। तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बरेली शहर आए थे। अपनी स्पीच में उन्होंने इस गाने का भी जिक्र किया। कहा कि लोग शहर आते हैं, तो झुमके के बारे में पूछते हैं, पर कुछ मिलता नहीं। तब बरेली डेवलपमेंट अथॉरिटी ने शहर में एनएच-24 पर जीरो प्वाइंट पर 14 फीट ऊंचे खंभे पर झुमका लगाया। जो झुमका तिराहा के नाम से फेमस है।
रणवीर और आलिया ने रायबरेली में गिरा दिया झुमका
बरेली के बाजार में झुमका गिरा रे, लोकगीत को शमशाद बेगम ने 1947 में आई फिल्म ‘देखो जी’ में गाया था। मेरा साया में राजा मेहंदी अली खान के लिखे गीत और इस लोकगीत में काफी अंतर है। ‘मेरा साया’ फिल्म में जहां बीच-बीच में ‘फिर क्या हुआ’ बोल का इस्तेमाल हुआ है तो लोकगीत में झुमका गिरने पर सास, ननंद और सैंया के रोने का जिक्र मिलता है। आज के दौर में भी अलग-अलग फिल्मों में यह गीत किसी न किसी रूप में शामिल होता रहा है। हाल में ही आई फिल्म ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ में बरेली की जगह रायबरेली में झुमके को गिरा दिया गया। बाद में इस गलती को जस्टिफाई करने के लिए रणवीर सिंह और आलिया भट्ट खास तौर से बरेली आए और बरेली-दिल्ली रोड पर लगाए गए झुमके के साथ फोटो शूट कराया था।
क्लारा स्वैन के जमाने का बाजार
बरेली का बाजार डेढ़ सौ साल से प्रसिद्ध है। ‘डॉक्टर मिस साहिबा’ के नाम से मशहूर क्लारा स्वैन ने बरेली में एशिया का पहला विमेन हॉस्पिटल खोला था। वह अमेरिका से 1870 में बरेली आईं थीं। साहित्यकार सुधीर विद्यार्थी बताते हैं कि क्लारा स्वैन ने बरेली प्रवास के दौरान न्यूयार्क में स्थित अपनी बहन को तीन फोटोग्राफ भेजे थे। पहला फोटो उस जमीन का था, जो नवाब रामपुर से हास्पिटल बनाने के लिए मिली थी। दूसरी तस्वीर कुतुबखाना की थी। बरेली में यह एक बड़ी लाइब्रेरी हुआ करती थी। तीसरी तस्वीर बरेली के बाजार की थी। बरेली के बाजार की वह तस्वीर अब भी मौजूद है। माना जाता है कि यह तस्वीर बड़ा बाजार की है। यह बाजार अब भी है। गुजिश्ता बरेली नाम से किताब लिख रहे डॉ। राजेश शर्मा बताते हैं कि उस जमाने में बड़ा बाजार बहुत व्यवस्थित था। सभी दुकानें एक जैसी बनवाट की और सुसज्जित थीं। दुकानों के दर पर लकड़ी की नक्काशीदार मेहराब बनी हुई थी।
हरिवंश-तेजी से झुमके का संबंध नहीं
कुछ लोगों ने एक किस्सा मशहूर कर दिया कि बरेली के झुमके का कॉन्सेप्ट हरिवंश राय बच्चन और तेजी बच्चन से निकला। कहा गया कि फिल्म एक्टर अमिताभ बच्चन के पिता और हिंदी कवि हरिवंश राय बच्चन और मां तेजी बच्चन बरेली में किसी की शादी में पहली बार मिले। तेजी ने मजाक में कहा कि मेरा झुमका बाजार में गुम गया है। उस शादी में फिल्म गीतकार राजा मेहंदी अली खां भी शामिल थे। बाद में मेहंदी अली ने फिल्म ‘मेरा साया’ में इस घटना को याद करते हुए एक गीत लिख दिया। सच्चाई यह है कि मेरा साया का यह गाना एक लोकगीत से प्रेरित है। साहित्यकार और कई शोध ग्रंथ लिख चुके सुधीर विद्यार्थी भी झुमके वाली बात को गलत बताते हैं। वह कहते हैं कि हरिवंश राय बच्चन और तेजी की मुलाकात उनके दोस्तों ने पूरे प्लान के साथ बरेली में कराई थी। मकसद यह था कि उन दोनों की मुलाकात के बाद उनकी शादी की बात चलाई जा सके। उनकी पहली मुलाकात कंपनी बाग (अब गांधी उद्यान) के पीछे एक कोठी में हुई थी। सुधीर विद्यार्थी एक रोचक बात बताते हैं। उन्होंने कहा कि हरिवंश राय बच्चन शादी के बाद बरेली में ही बसना चाहते थे, लेकिन तेजी बच्चन इसके लिए तैयार नहीं हुईं। वरना आज अमिताभ बच्चन का एक घर बरेली में भी होता।
रिपोर्ट- स्वप्न दास


