लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति से बड़ी खबर सामने आई है. बहुजन समाज पार्टी में पारिवारिक कलह थमने का नाम नहीं ले रहा है। पार्टी सुप्रीमो मायावती (Mayawati) ने अपने दूसरे भतीजे ईशान आनंद को भी पार्टी से बाहर कर दिया है. इससे पहले आकाश आनंद को मायावती पार्टी से निकाल चुकी हैं.
मायावती ने क्या-क्या फैसले लिए
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मायावती ने एक लंबा चौड़ा पोस्ट लिखा है जिसमें उन्हें कई बातें कही हैं. बीएसपी सुप्रीमों ने पोस्ट के जरिए कहा, ‘मेरे अविवाहित होने के नाते मुझे मजबूरी में, अपने सभी सगे भाई-बहनों में से किसी एक को और अन्ततः सबसे छोटे भाई आनन्द कुमार को अपने साथ रखने की भी ज़रूरत पड़ी है जो यह मेरी देखभाल करने के साथ-साथ मेरी पूरी निगरानी में पार्टी की अहम ज़िम्मेदारियों को भी काफी लंबे समय से निभा रहे हैं, लेकिन इसका लाभ अब उनके परिवार के लोग भी उठाएं तो यह पार्टी और मूवमेंट के हित में सही नहीं होगा।’
मायावती की सियासी प्रतिज्ञा
उन्होंने आगे लिखा, ‘इसलिए आज मेरा अंतिम यही फैसला और प्रतिज्ञा भी है कि इसके एवज में, अब इनके खासकर किसी भी बेटे को बीएसपी में किसी भी छोटे-बड़े पद पर बने रहकर राजनीति करने का मौका नहीं दिया जायेगा। यदि आगे चलकर मेरे साथ रहते हुये आनन्द कुमार को मेरी मदद के लिए किसी और सदस्य की भी ज़रूरत पड़ती है तो फिर वह वर्तमान राजनैतिक हालात में केवल अपनी इकलौती बेटी कुमारी दीपिका आनन्द को, जो इस समय वकालत की पढ़ाई कर रही है, उसे आगे चलकर उसकी मदद ले सकते हैं और फिर उसकी ईमानदारी, वफादारी और कार्य क्षमता आदि को देखकर पार्टी में उसे ज़रूरतानुसार अपनी ख़ुद की ज़िम्मेवारी भी सौंप सकते हैं।
1. वैसे तो बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) द्वारा पूरे देश भर में व ख़ासकर उत्तर प्रदेश में युवाओं को तरजीह देने की नीति के तहत जेन-जी को लगभग पचास प्रतिशत तक पार्टी संगठन में भागीदारी सुनिश्चित करने की प्रक्रिया काफी लम्बे समय से जारी है, किन्तु अब यूपी, उत्तराखण्ड एवं पंजाब…
— Mayawati (@Mayawati) September 12, 2026
आकाश आनंद के बच्चों को भी बीएसपी में नहीं मिलेगी जगह
मायावती ने आगे साफ कर दिया कि वो अपने दोनों बेटों को और आगे चलकर उनके युवा बच्चों में से किसी को भी अपनी यह ज़िम्मेवारी नहीं सौपेंगे। साथ ही, यह भी कहना है कि अपनी बेटी के तैयार नहीं होने पर फिर वे पार्टी की आम सहमति से केवल पार्टी के दलित वर्ग में से ही अन्य किसी मिशनरी कार्यकर्ता को भी अपनी यह ज़िम्मेवारी सौंप सकते हैं.
उन्होंने आगे लिखा, यानी वो अपने किसी भी बेटे को और उनके बच्चों के बड़े होने पर उन्हें भी यह ज़िम्मेवारी नहीं सौंपेंगे। यही वर्तमान में समय की जरुरत है और पार्टी के हित में भी है।
रिपोर्ट: कुणाल कौशल


