बस्ती: यूपी के बस्ती जिले में पूर्व थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह आत्महत्या मामले में पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। थानाध्यक्ष की मौत कोई सामान्य आत्महत्या नहीं, बल्कि एक बेहद खतरनाक और शातिर ‘हनीट्रैप’ गिरोह की ब्लैकमेलिंग के कारण हुई थी।
बस्ती रेंज के डीआईजी संजीव त्यागी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस पूरे एक्सटॉर्शन सिंडिकेट का खुलासा किया है। पुलिस ने गिरोह की मास्टरमाइंड महिला, उसके पिता और उन्हें कानूनी संरक्षण देने वाले साथी वकील को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।
सरकारी आवास में मिली थी लाश
29 अगस्त को कलेक्ट्रेट परिसर स्थित सरकारी आवास में जब तत्कालीन थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह फंदे से लटके मिले, तो पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था। मृतक के पुत्र संदीप सिंह की तहरीर पर कोतवाली बस्ती में मुकदमा दर्ज कर जब पुलिस और सर्विलांस टीम ने कॉल डिटेल्स खंगाली, तो एक खौफनाक साजिश की परतें खुलती चली गईं।
जांच में सामने आया कि आत्महत्या के चंद घंटे पहले, दोपहर 1 बजकर 41 मिनट पर थानाध्यक्ष को अंतिम फोन कॉल की गई थी। यह कॉल किसी और की नहीं, बल्कि गिरोह के सहयोगी वकील विजय प्रकाश की थी, जो उन पर समझौते और रकम के लिए लगातार दबाव बना रहा था। इसी मानसिक प्रताड़ना और ब्लैकमेलिंग से टूटकर थानाध्यक्ष ने आत्मघाती कदम उठा लिया।
महिला पिता और वकील के साथ मिलकर कर रही थी ब्लैकमेल
डीआईजी संजीव त्यागी के मुताबिक, यह हनीट्रैप गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से अपना जाल बिछाता था। गिरोह की मुख्य आरोपी 32 साल की प्रियंका चौधरी, पिछले 10 सालों से अपने पति से अलग रहकर मुंबई के स्पा और ब्यूटी पार्लर में काम करती थी। वो रसूखदार और संपन्न लोगों को पहले प्रेमजाल में फंसाती थी।
थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह को भी इसी जाल में उलझाया गया। प्रियंका पहले संबंध बनाती और फिर वीडियो-ऑडियो रिकॉर्ड कर लेती थी। इसके बाद शुरू होता था ब्लैकमेलिंग का खेल। प्रियंका वीडियो कॉल पर अपनी कलाई काटकर आत्महत्या का ड्रामा करती और खुदकुशी के झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देती। वहीं, उसका पिता रामनयन और स्थानीय वकील विजय प्रकाश कानूनी कार्रवाई का खौफ दिखाकर 1 करोड़ रुपये की भारी-भरकम उगाही की डील कर रहे थे।
पुलिस की तफ्तीश में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह का नेटवर्क सिर्फ बस्ती तक ही सीमित नहीं था। मध्य प्रदेश के जबलपुर निवासी एक बड़े व्यापारी को भी इसी तरह नस काटने का वीडियो भेजकर 1 करोड़ रुपये की मांग की गई थी, जिससे 15 लाख रुपये वसूले जा चुके थे।
इसके अलावा गिरोह ने अपने मकान मालिक डॉक्टर उमेश से 4 लाख रुपये और उगाही के पैसों से खरीदी गई बोलेरो के चालक अहमद रजा तक से 5 लाख रुपये ऐंठ लिए थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से घटना में प्रयुक्त बोलेरो गाड़ी, तीन मोबाइल फोन, कई आपत्तिजनक वीडियो और आत्महत्या के ड्रामे से जुड़े डिजिटल साक्ष्य बरामद कर लिए हैं।
डीआईजी बस्ती ने साफ किया है कि गिरोह द्वारा ब्लैकमेलिंग और हनीट्रैप के जरिए अर्जित की गई करोड़ों की अवैध संपत्ति को बीएनएस की धारा 107 के तहत कुर्क किया जाएगा। खाकी को ब्लैकमेल कर मौत के मुंह में धकेलने वाले तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है, जबकि इस गिरोह के चंगुल में फंसे अन्य पीड़ितों और पूरे वित्तीय लेन-देन की गहनता से जांच की जा रही है।
रिपोर्ट: इमरान अली


