कौशांबी: उत्तर प्रदेश के कौशांबी में पटाखा फैक्टरी में हुए भीषण विस्फोट के बाद पुलिस और प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। सोमवार को हुए इस हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें आठ बच्चे भी शामिल हैं। पांच लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर है। घटना के अगले ही दिन मंगलवार तड़के पुलिस ने मुख्य आरोपी नौशाद को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद प्रशासन ने उसके अवैध पटाखा गोदाम को जेसीबी से ध्वस्त कर दिया।
तड़के पुलिस से हुई मुठभेड़, गोली लगने के बाद पकड़ा गया आरोपी
पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी नौशाद के बारे में मंगलवार सुबह करीब चार बजे सूचना मिली थी कि वह चरवा थाना क्षेत्र में 13 मील सराय सहावा रोड से भागने की कोशिश कर रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने इलाके में घेराबंदी कर दी। पुलिस का दावा है कि खुद को घिरा देखकर नौशाद ने टीम पर फायरिंग कर दी। जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई। इस दौरान गोली लगने से नौशाद घायल हो गया। पूछताछ में उसने अपनी पहचान नौशाद पुत्र निजामुद्दीन, निवासी मनौरी के तौर पर बताई। घायल आरोपी को इलाज के लिए मंझनपुर जिला अस्पताल भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
आरोपी के पटाखा गोदाम पर चला बुलडोजर
हादसे के बाद प्रशासन ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद डीएम अमित पाल के आदेश पर घटनास्थल से करीब 400 मीटर दूर स्थित नौशाद के पटाखा गोदाम को जेसीबी से गिरा दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, यह गोदाम भी पटाखों के भंडारण के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम ने परिसर की जांच की और दस्तावेज खंगाले। इसके बाद गोदाम को ध्वस्त करने की कार्रवाई की गई। डीएम ने कहा है कि आरोपी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत भी कार्रवाई की जाएगी।
2024 में रद्द हो चुका था फैक्टरी का लाइसेंस
इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल फैक्टरी के संचालन को लेकर खड़ा हो गया है। अधिकारियों के अनुसार, फैक्टरी का लाइसेंस वर्ष 2024 में ही रद्द हो चुका था। इसके बावजूद वहां पटाखों का निर्माण और भंडारण कैसे जारी रहा, इसकी जांच कराई जाएगी। प्रशासन अब फैक्टरी और गोदाम से जुड़े लाइसेंस, अनुमति और दूसरे दस्तावेजों की जांच करेगा। यह भी देखा जाएगा कि प्रतिबंध के बाद फैक्टरी को दोबारा चलाने की अनुमति किस स्तर पर मिली और इसके लिए जिम्मेदार कौन लोग हैं।
सोमवार दोपहर हुआ था भीषण विस्फोट
यह हादसा सोमवार 31 अगस्त को पिपरी थाना क्षेत्र के मनौरी बाजार में हुआ था। दोपहर करीब 12 बजे पटाखा फैक्टरी में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने वहां रखे पटाखों को अपनी चपेट में ले लिया और एक के बाद एक कई जोरदार धमाके होने लगे। धमाकों की आवाज करीब दो किलोमीटर दूर तक सुनाई देने की बात सामने आई।
कुछ ही देर में फैक्टरी के ऊपर धुएं का घना गुबार छा गया। आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए घरों से बाहर निकल आए। विस्फोट इतना तेज था कि फैक्टरी की पूरी इमारत तबाह हो गई। आसपास के करीब छह मकानों को भी नुकसान पहुंचा। मलबे में कई लोग दब गए थे, जिन्हें बचाव दल ने काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाला।
आठ बच्चों समेत 11 लोगों की मौत
हादसे में अब तक 11 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। मृतकों में आठ बच्चे शामिल हैं। पांच अन्य लोग घायल हुए हैं। गंभीर रूप से झुलसे लोगों को इलाज के लिए प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल भेजा गया है। बताया जा रहा है कि घायलों में कुछ की हालत बेहद नाजुक है और तीन लोगों को वेंटिलेटर पर रखा गया है। घटना के बाद अस्पताल में भी अफरा-तफरी का माहौल रहा।
अब जिम्मेदारी तय करने में जुटा प्रशासन
हादसे के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के लिए चार टीमें गठित की थीं। टीमें लगातार उसकी तलाश में जुटी थीं। मंगलवार तड़के हुई कार्रवाई के बाद नौशाद को गिरफ्तार कर लिया गया है। अब जांच का फोकस इस बात पर है कि लाइसेंस रद्द होने के बावजूद फैक्टरी में पटाखों का कारोबार कैसे चलता रहा।
प्रशासन यह भी पता लगाने में जुटा है कि अवैध गोदाम में कितना विस्फोटक और पटाखा सामग्री रखी गई थी और सुरक्षा नियमों का कितना पालन किया जा रहा था। 11 लोगों की मौत के बाद प्रशासन ने साफ संकेत दिए हैं कि हादसे के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


